‘भारत अपने विकल्प चुनने के लिए हमेशा स्वतंत्र रहेगा, यूक्रेन-गाजा पर UNSC को घेरा विदेश मंत्री ने
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें उच्चस्तरीय सत्र में भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत ढंग से प्रस्तुत किया। वैश्विक नेताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत समकालीन विश्व में तीन प्रमुख सिद्धांतों—’आत्मनिर्भरता’, ‘आत्मरक्षा’ और ‘आत्मविश्वास’ पर आगे बढ़ रहा है और यह हमेशा अपने विकल्प चुनने की स्वतंत्रता कायम रखेगा।
जयशंकर ने ‘आत्मनिर्भरता’ का अर्थ समझाते हुए कहा कि इसका मतलब है अपनी क्षमताएं बढ़ाना, अपनी शक्ति मजबूत करना और प्रतिभा को आगे बढ़ने देना। उन्होंने विनिर्माण, अंतरिक्ष कार्यक्रमों, दवाइयों और डिजिटल अनुप्रयोगों में भारत की प्रगति का हवाला देते हुए कहा कि “भारत में निर्माण और नवाचार से विश्व को भी लाभ होता है।”
‘आत्मरक्षा’ पर बात करते हुए विदेश मंत्री ने आतंकवाद के प्रति ‘कतई बर्दाश्त नहीं’ करने की नीति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अपने लोगों की रक्षा और देश-विदेश में उनके हितों को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें सीमाओं की मजबूत सुरक्षा और विदेशों में अपने समुदाय की सहायता करना शामिल है।
‘आत्मविश्वास’ को सबसे अधिक आबादी वाले देश और तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की पहचान बताते हुए उन्होंने घोषणा की कि भारत हमेशा ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की आवाज बना रहेगा।
यूक्रेन और पश्चिम एशिया (गाजा) में चल रहे दो प्रमुख संघर्षों के संदर्भ में जयशंकर ने सीधा सवाल उठाया कि क्या संयुक्त राष्ट्र अपेक्षाओं पर खरा उतरा है। उन्होंने कहा कि इन संघर्षों ने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। भारत का रुख साफ है: भारत शत्रुता समाप्त करने का आह्वान करता है और शांति बहाल करने में मदद करने वाली किसी भी पहल का समर्थन करेगा। व्यापार के मुद्दे पर उन्होंने शुल्क में अस्थिरता का जिक्र किया और आपूर्ति के सीमित स्रोतों या किसी एक बाजार पर अत्यधिक निर्भरता से बचने (डी-रिस्किंग) को महत्वपूर्ण बताया।