25 साल बाद फिर जिंदा हुआ शिल्पी-गौतम हत्याकांड! प्रशांत किशोर ने डिप्टी CM सम्राट चौधरी पर लगाया सनसनीखेज आरोप

बिहार की राजनीति एक बार फिर अपने पुराने और सबसे सनसनीखेज जख्मों को कुरेद रही है। जन सुराज के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने हाल ही में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 1999 का कुख्यात शिल्पी-गौतम मर्डर केस आज भी अनसुलझा है और इसमें सम्राट चौधरी का नाम संदिग्ध रूप से जुड़ा था।

कौन थीं शिल्पी जैन?

शिल्पी जैन पटना वीमेंस कॉलेज की एक होनहार छात्रा थीं, जिन्होंने अपनी खूबसूरती और बुद्धिमत्ता के दम पर ‘मिस पटना’ का खिताब जीता था। उनके पिता शहर के जाने-माने कपड़ा कारोबारी थे। वहीं, गौतम सिंह एक संपन्न परिवार से थे और राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते थे। धीरे-धीरे दोनों की मुलाकात दोस्ती और फिर प्यार में बदल गई।

3 जुलाई 1999: वह भयावह दिन

उस सुबह शिल्पी हमेशा की तरह कंप्यूटर क्लास जाने निकलीं। रास्ते में गौतम के एक परिचित ने उन्हें कार में बैठने को कहा। शिल्पी उसे जानती थीं, इसलिए बिना शक कार में बैठ गईं। लेकिन कार सीधे क्लासरूम की बजाय ‘वाल्मी गेस्ट हाउस’ पहुंची, जहां उनकी जिंदगी ने भयावह मोड़ ले लिया।

मदद की पुकार और मौत का मंजर

गेस्ट हाउस पहुंचने के कुछ देर बाद गौतम भी वहां पहुंचे। उन्होंने देखा कि कुछ लोग शिल्पी को जबरन परेशान कर रहे थे। शिल्पी मदद के लिए चिल्ला रही थीं। लेकिन हमलावरों ने गौतम को पकड़ लिया और बेरहमी से पीटकर मार डाला। इसके बाद शिल्पी भी दरिंदगी का शिकार बनीं।

कार से बरामद हुई अर्धनग्न लाशें

उसी रात पटना के फ्रेजर रोड स्थित एक सरकारी क्वार्टर के गैराज से सफेद मारुति कार बरामद हुई। अंदर शिल्पी और गौतम की दो लाशें थीं। दोनों अर्धनग्न अवस्था में मिले— शिल्पी पर केवल गौतम की टी-शर्ट थी, और गौतम बिल्कुल निर्वस्त्र थे।

जांच में लापरवाही और सबूतों से छेड़छाड़

वह गैरेज उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के भाई बाहुबली साधु यादव का था। आरोप लगा कि पुलिस मौके पर देरी से पहुंची और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई। फिंगरप्रिंट और अहम सबूत मिटाने के लिए कार को टो करने की बजाय चलाकर ले जाया गया।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में साफ था कि शिल्पी के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ और गौतम की पीटकर हत्या की गई। बावजूद इसके, पुलिस ने पहले इसे आत्महत्या करार दिया। भारी दबाव में मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने कई साल जांच की, लेकिन 2003 में अचानक इस केस को ‘आत्महत्या’ बताकर बंद कर दिया।

दो दशक बाद, प्रशांत किशोर ने इस केस को फिर से सुर्खियों में ला दिया है और उन्होंने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर उंगली उठाई है। यह केस आज भी बिहार की राजनीति का सबसे काला धब्बा माना जाता है, जहां न्याय की मांग आज भी अनसुलझी है।

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