चुनावी समीकरण पलटा! मुस्लिम बहुल सीमांचल में सबसे ज्यादा नाम डिलीट, सबसे ज्यादा वोटर NDA के कमजोर क्षेत्र में जुड़े
बिहार वोटर लिस्ट: मगध में सबसे ज्यादा नए वोटर जुड़े, सीमांचल में हटाए गए सर्वाधिक नाम
भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद अंतिम वोटर लिस्ट जारी कर दी है। इस डेटा के इलाकेवार विश्लेषण में महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एनडीए (NDA) के लिए कमजोर माने जाने वाले मगध क्षेत्र में सबसे ज्यादा नए वोटर जोड़े गए हैं, जबकि मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र से सबसे अधिक नाम हटाए गए हैं।
अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, बिहार में कुल ७.४२ करोड़ पात्र मतदाता हैं। ड्राफ्ट से अंतिम सूची में करीब १८ लाख नए मतदाता जुड़े हैं।
आंकड़ों पर गौर करें तो, एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले और अंतिम मतदाता सूची के आधार पर गोपालगंज जिले में सबसे ज्यादा १२.१३% नामों को हटाया गया है। गोपालगंज में कुल 6 विधानसभा सीटें हैं, जहां 2020 के चुनाव में एनडीए ने 4 और महागठबंधन (MGB) ने 2 सीटें जीती थीं।
वहीं, चार जिलों वाले मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र में औसतन ७.७% वोटर्स के नाम काटे गए हैं, जो राज्य के जिलेवार हटाए गए नामों के औसत (५.९%) से काफी अधिक है। सीमांचल में मुस्लिम आबादी लगभग ४८% है। इस क्षेत्र के किशनगंज में ९.६९%, पूर्णिया में ८.४१%, कटिहार में ७.१२% और अररिया में ५.६ प्रतिशत नाम काटे गए हैं।
इसके विपरीत, एनडीए की कमजोर कड़ी माने जाने वाले मगध क्षेत्र में वोटर जोड़ने की दर २.६% रही, जो बिहार के अन्य क्षेत्रों से सबसे अधिक है। हालांकि, नाम कटने की अधिक दर के बावजूद, सीमांचल में ड्राफ्ट रोल के बाद अंतिम मतदाता सूची में २.४% नए वोटर्स जोड़े गए, जो राज्य की औसत वृद्धि दर २.३% के लगभग बराबर है।