सोने की लंका भीग गई! रावण दहन से डेढ़ घंटा पहले हुई मूसलाधार बारिश, डीजल डालने पर भी पूरी तरह नहीं जल पाया अहंकार का पुतला
दशहरा पर्व पर गुरुवार को देश भर में रावण का पुतला दहन किया गया। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में भी बन्नू बिरादरी दशहरा कमेटी की ओर से रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित हुआ। लेकिन रावण दहन से करीब डेढ़ घंटे पहले हुई भारी बारिश के कारण लोग इस पर्व का लुत्फ सही ढंग से नहीं उठा पाए।
परेड ग्राउंड में शाम 6 बजे रावण का पुतला दहन किया गया। मगर उससे ठीक पहले करीब 4:30 बजे हुई मूसलाधार बारिश के कारण रावण का पुतला बुरी तरह भीग गया, जिस वजह से पुतला पूरी तरह से नहीं जल पाया।
देश की आजादी के बाद से ही देहरादून में बन्नू बिरादरी द्वारा दशहरा कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में इस साल भी 78वां दशहरा कार्यक्रम परेड ग्राउंड में आयोजित किया गया। दशहरा पर्व से तीन दिन पहले रावण का पुतला लगा दिया गया था। तब भी भारी बारिश के कारण पुतला गीला हो गया था, लेकिन दो दिनों की कड़क धूप से उम्मीद थी कि पुतला बेहतर ढंग से जलेगा। हालांकि, कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले हुई बारिश ने लोगों के उत्साह को फीका कर दिया।
रावण, कुंभकरण, मेघनाद और लंका रही अधूरी
इस साल परेड ग्राउंड में 121 फीट ऊंचा रावण का पुतला लगाया गया था, साथ ही मेघनाद का 70 फीट और कुंभकरण का 75 फीट का पुतला था। इतना ही नहीं, रावण की सोने की लंका भी बनाई गई थी। लेकिन बारिश की वजह से न ही पूरी तरह से रावण की लंका जल पाई और न ही कुंभकरण व मेघनाद का पुतला आधा-अधूरा ही जल सका। रावण के पुतले को जलाने के प्रयास से पहले डीजल भी डाला गया, मगर गीला होने के कारण वह पूरी तरह से नहीं जल पाया।
इस साल भी परेड ग्राउंड में हजारों की भीड़ देखने को मिली, लेकिन लोग इस बात से मायूस थे कि बारिश की वजह से पुतले पूरी तरह से जल नहीं पाए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी समेत कई विधायक शामिल हुए।
सीएम धामी का संदेश
कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि दशहरा पर्व न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अमूल्य हिस्सा है, बल्कि यह हमें मानव जीवन में धर्म, सत्य और मर्यादा के महत्व का बोध कराता है। उन्होंने कहा, यह हमें रावण जैसे अहंकारी और अधर्मी के अंत और भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन के गुणों का स्मरण कराता है।
सीएम ने कहा कि दशहरा पर्व हमें यह संदेश देता है कि अधर्म, अन्याय और अहंकार चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अंत में उसकी हार निश्चित है। उन्होंने लोगों से अपने अंदर की बुराइयों का त्याग कर सत्य, धर्म और मानवता की राह पर चलने का संकल्प लेने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने अंत में यह भी कहा कि विजयादशमी पर्व हमें याद दिलाता है कि समाज में अभी भी कई रावणों का संहार करना बाकी है, क्योंकि समय बदल गया है, लेकिन रावण आज भी अलग-अलग रूपों में हमारे बीच मौजूद है।