जल निकासी करें और मेढ़ दुरुस्त रखें, कृषि वैज्ञानिकों की किसानों को सलाह, धान और मक्का की फसल के लिए विशेष व्यवस्था
बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव की वजह से झारखंड में मौसम में बड़े बदलाव दिखाई दे रहे हैं। मौसम केंद्र द्वारा 5 अक्टूबर तक राज्य के लगभग सभी जिले में हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा होने की संभावना बताई गई है। वहीं, कुछ जिलों में भारी वर्षा होने के संकेत हैं। खासकर किसानों से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की गई है। मौसम केंद्र के अनुसार इस दौरान वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की तेज हवाएं चलने की संभावना है।
5 अक्टूबर तक भारी बारिश के आसार: मौसम केंद्र के पूर्व अनुमान पदाधिकारी के अनुसार:
- 3 अक्टूबर: कोडरमा, गिरिडीह, लोहरदगा, बोकारो, रामगढ़, रांची, गुमला आदि जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है।
- 4 अक्टूबर: देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज, कोडरमा, चतरा, गढ़वा, पलामू, हजारीबाग जिले में कहीं-कहीं भारी वर्षा की संभावना है।
- 5 अक्टूबर: दुमका, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज जिले में कहीं-कहीं भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह: कोडरमा कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर ए के राय ने बताया कि मौसम में बदलाव की वजह से 4 दिनों की बारिश का असर फसल पर भी पड़ेगा। उन्होंने किसानों को निम्नलिखित समस्याओं से बचने के लिए उचित व्यवस्था करने को कहा:
- जल निकासी पर ध्यान दें: वर्षा के कारण सब्जियों का सड़ना, नर्सरी में जल जमाव के कारण पौधों का सड़ना, फल एवं सब्जियों के फलों का झड़ना आदि समस्याएं हो सकती हैं। इसके लिए उचित जल निकासी की व्यवस्था करें। परिपक्व फल एवं सब्जियों की तुड़ाई कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखें।
- फसल की सुरक्षा: धान की फसल में जल जमाव बनाए रखने के लिए किसान मेढ़ को दुरुस्त रखें। कीट एवं रोगों के लिए फसल की निगरानी रखें; किसी भी तरह के छिड़कावों के लिए साफ मौसम का इंतजार करें। मक्का, दलहनी एवं तिलहनी फसल के खेतों में जल निकासी की उचित सुविधा रखें, क्योंकि जल जमाव से उपज में कमी आ सकती है। वर्षा के पश्चात रोग एवं कीट के लिए विशेष निगरानी रखें।