ऑनलाइन मनी गेम्स बैन! अब जुआ खिलाने पर 3 साल की जेल, केंद्र ने लागू किए ‘PROG’ नियम, तुरंत जानें 5 बड़े बदलाव।

केंद्र सरकार ने देश में ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रभावी ढंग से प्रतिबंध लगाने के लिए ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग (PROG) रूल्स, 2025’ को अधिसूचित कर दिया है। यह नया कानून हाल ही में पारित ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध के तहत गेमिंग जगत के संचालन के लिए एक मजबूत ढांचा स्थापित करता है।

नए नियमों के तहत गेमिंग इंडस्ट्री में होने वाले 5 सबसे महत्वपूर्ण बदलाव निम्नलिखित हैं:

1. ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI) का गठन: ड्राफ्ट रूल्स में सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI) के निर्माण का है। यह एजेंसी नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में मुख्यालय वाली एक केंद्रीय डिजिटल नियामक के रूप में काम करेगी और इसका नेतृत्व इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) का एक वरिष्ठ अधिकारी करेगा। OGAI खेल निर्धारण, पंजीकरण और प्रवर्तन की दिशा में काम करेगा।

2. तीन-स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र: उपयोगकर्ता के हितों की रक्षा के लिए नियमों में तीन-स्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली का प्रस्ताव है। उपयोगकर्ताओं को पहले पंजीकृत ऑनलाइन गेमिंग सेवा प्रदाता के आंतरिक शिकायत अधिकारी से संपर्क करना होगा। समाधान न होने पर, वे शिकायत अपीलीय समिति (GAC) और अंत में OGAI से संपर्क कर सकते हैं।

3. उपयोगकर्ता फंड के लिए 180 दिन का क्लॉज: PROG में उन फंडों के लिए एक ट्रांजिशनल क्लॉज अनिवार्य किया गया है जो नियमों के लागू होने से पहले एकत्र किए गए थे। बैंक या मध्यस्थ इस अवधि के दौरान खिलाड़ियों को रिफंड प्रोसेस कर सकते हैं, जिसे अवैध मनी गेमिंग का समर्थन नहीं माना जाएगा। यह प्रावधान प्रवर्तन की तारीख से 180 दिनों तक प्रभावी रहेगा।

4. कड़े अपराध और दंड: PROG के तहत अपराध और उल्लंघनों के लिए अब भारी जुर्माना और दंड लगाया जाएगा। ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवाएं देने पर तीन साल तक की कैद और ₹1 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है। ऑनलाइन मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म का विज्ञापन करने पर भी दो साल तक की कैद और ₹50 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।

5. बिना वारंट तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी का अधिकार: ड्राफ्ट में कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों के पास बिना वारंट तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी करने की शक्ति होगी। धारा 5 (कंपनियों/व्यक्तियों द्वारा ऑनलाइन मनी गेम्स को बढ़ावा देने पर रोक) और धारा 7 (बैंकों/वित्तीय संस्थानों द्वारा ऐसे लेनदेन को प्रोसेस करने पर रोक) के तहत अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती (Cognizable and Non-bailable) माना जाएगा।

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