जारनवाला हिंसा के 2 साल, ‘चर्च जलाने वाले सैकड़ों हमलावर बाहर! सिर्फ 1 आरोपी को सजा, पीड़ितों को आज भी न्याय का इंतज़ार।

पाकिस्तान के जारनवाला में भीड़ की हिंसा की दुखद घटना को दो साल बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित और मानवाधिकार कार्यकर्ता आज भी न्याय से कोसों दूर हैं। 16 अगस्त, 2023 को ईशनिंदा के झूठे आरोपों पर भड़की भीड़ ने 26 से अधिक चर्चों और 80 से अधिक ईसाई घरों को जला दिया था, जो पाकिस्तान के इतिहास में अल्पसंख्यकों पर हुए सबसे बुरे हमलों में से एक था।

ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) के एक सम्मेलन में पीड़ितों ने न्याय प्रक्रिया की विफलता को उजागर किया:

1. महज एक व्यक्ति को सजा, मुख्य आरोपी रिहा: इस बड़े पैमाने के हमले के बावजूद, जांच पूरी होने के दो साल बाद केवल एक व्यक्ति को दोषी ठहराया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि सेंट जॉन चर्च को आग लगाने वाले मुख्य आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया गया और स्थानीय लोगों ने उसका माला पहनाकर स्वागत किया। अल्पसंख्यक अधिकार आंदोलन के सदस्य और हमले के पीड़ित शकील भट्टी ने कहा कि सरकार ने जारनवाला को ‘टेस्ट केस’ बनाने का जो वादा किया था, वह ‘खोखला’ साबित हुआ है।

2. जांच और अदालती प्रक्रिया में खामियां: पीड़ितों ने न्यायिक और जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियों का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, जारनवाला में 3,200 से अधिक वीडियो फुटेज उपलब्ध होने के बावजूद कोई फोरेंसिक जांच नहीं की गई। साथ ही, जांच अधिकारियों ने कभी पीड़ितों से संपर्क नहीं किया और कई FIRs को जजों द्वारा ‘सील’ कर दिया गया।

3. अपर्याप्त मुआवजा और लगातार धमकी: पीड़ितों ने बताया कि कई परिवारों को अब तक सरकारी मुआवजा नहीं मिला है, जबकि मुआवजा वितरण भी असमान रहा है। वहीं, जमानत पर छूटे हमलावर अब पीड़ितों को लगातार नए हमलों की धमकी दे रहे हैं ताकि वे अपने मामले वापस ले लें।

ईसाई अधिकार कार्यकर्ता लाला रॉबिन डेनियल ने बताया कि इस मामले में 46 ईसाइयों को गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया गया था, जबकि 300 से अधिक हमलावरों को बिना किसी नतीजे के रिहा कर दिया गया है। यह घटना पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए न्याय प्रणाली की निराशाजनक स्थिति को दर्शाती है

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *