सच्चाई उजागर, ‘UPSC में सफल उम्मीदवारों में से 75% ने ली थी सिर्फ ‘फ्री कोचिंग’! दृष्टि IAS की धोखाधड़ी पर लगाम
सफलता के झूठे विज्ञापन और महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने के मामले में, देश के प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान दृष्टि आईएएस (Drishti IAS) को केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने भारी जुर्माना लगाया है। संस्थान ने अपने विज्ञापन में प्रमुखता से “UPSC CSE 2022 में 216+ सेलेक्शन” का दावा किया था, जिसके साथ सफल उम्मीदवारों के नाम और तस्वीरें भी प्रकाशित की गई थीं।
छिपाई गई थी महत्वपूर्ण जानकारी
उपभोक्ता न्यायालय ने जांच के बाद पाया कि संस्थान का यह दावा भ्रामक था और इसमें सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए कोर्स के प्रकार और अवधि से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई थी।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दृष्टि आईएएस द्वारा दावा किए गए 216 उम्मीदवारों में से 162 उम्मीदवारों (लगभग 75%) ने UPSC CSE के प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा को स्वतंत्र रूप से पास करने के बाद संस्थान का केवल मुफ्त इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम (IGP) लिया था। इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम और अन्य कोर्स में केवल 54 छात्र ही नामांकित थे।
उपभोक्ता न्यायालय के अनुसार, महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाने से यूपीएससी के उम्मीदवारों और अभिभावकों को यह विश्वास दिलाया गया कि दृष्टि आईएएस ही परीक्षा के सभी चरणों में उनकी सफलता का कारण था। कोर्ट ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28) के तहत ‘भ्रामक विज्ञापन’ करार दिया।
‘दृष्टि IAS द्वारा दोहराया गया उल्लंघन’
उपभोक्ता न्यायालय ने यह भी कहा कि इसी तरह के आचरण के लिए कोचिंग संस्थान पर यह दूसरी बार जुर्माना लगाया गया है। इससे पहले, सितंबर 2024 में भी दृष्टि आईएएस पर “UPSC CSE 2021 में 150+ सेलेक्शन” के भ्रामक दावे के लिए जुर्माना लगाया गया था। उस मामले में भी, 161 उम्मीदवारों में से 148 छात्र IGP कोर्स में नामांकित थे।
अधिकारियों ने बताया कि अब तक 54 कोचिंग संस्थानों को भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए नोटिस जारी किए गए हैं, और 26 कोचिंग संस्थानों पर ऐसे भ्रामक दावों को बंद करने के निर्देश के साथ ₹90.6 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया गया है।