कोजागरी लक्ष्मी पूजा 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट, धन-समृद्धि के लिए करें तैयारी
अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को कोजागरी लक्ष्मी पूजा मनाई जाती है। यह दिन माँ लक्ष्मी को समर्पित है, जिन्हें धन, सुख, शांति और सौभाग्य की देवी माना जाता है। इस वर्ष लक्ष्मी पूजा के समय को लेकर दो पंचांगों में slight अंतर है।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और तिथि (Kojagari Laxmi Puja Timing & Tithi):
- विशुद्ध सिद्धांत पंचांग के अनुसार: पूर्णिमा तिथि का आरंभ सोमवार (6 अक्टूबर) को दोपहर 12 बजकर 25 मिनट पर होगा। यह अगले दिन, मंगलवार (7 अक्टूबर) को सुबह 9 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगी।
- गुप्त प्रेस पंचांग के अनुसार: पूर्णिमा तिथि का आरंभ सोमवार (6 अक्टूबर) को सुबह 11 बजकर 12 मिनट 43 सेकंड पर होगा। यह अगले दिन मंगलवार (7 अक्टूबर) को सुबह 9 बजकर 31 मिनट 27 सेकंड तक रहेगी।
कोजागरी लक्ष्मी पूजा के लिए आवश्यक सामग्री की पूरी सूची:
जो लोग घर पर स्वयं पूजा करते हैं, वे इन सामग्री को बाज़ार से खरीद लें। पूजा के लिए माँ लक्ष्मी की मूर्ति, तस्वीर या सोंडा (सराव) का उपयोग किया जा सकता है।
मुख्य पूजा सामग्री:
- कलश स्थापना: एक कलश (पीतल/ताँबा/मिट्टी), धान, दूर्वा, आम के पत्ते, गंगा मिट्टी या तुलसी की जड़ की मिट्टी। कलश के लिए नया गमछा।
- फल और अन्य: सशिष डाब/कटहली केला/नारियल/सुपारी, 5 साबुत फल।
- श्रृंगार: देवी के लिए कमल का फूल (अनिवार्य), माला, चाँदमाला, सिंदूर का गोला, आलता, माँ की ओढ़नी, शंख, पोला, लोहा।
- अन्य वस्तुएँ: धूपदानी, धूप-अगरबत्ती, पंच प्रदीप, कपूर, तिल का तेल/घी, पंचगुड़ी, पंचगव्य, पंचरत्न।
- अतिरिक्त: लक्ष्मी झाँपी, सिंदूर की डिब्बी, आँवला (4), सिंदूर, अतप चावल, लक्ष्मी कौड़ी (5), सूखी हल्दी (5), सुपारी (5), पान का पत्ता, कमल बीज (5)।
प्रसाद: माँ लक्ष्मी को लाई (खील), मूढ़ी, मुरकी, मोआ, नारियल लड्डू, तिल लड्डू, चिवड़ा, बताशा, मिठाई और खीर (पायस) बहुत प्रिय हैं।
पूजा विधि ध्यान दें: मां लक्ष्मी की पूजा से पहले भगवान नारायण की पूजा अवश्य करें। नारायण को तुलसी दल अर्पित करें, लेकिन माँ लक्ष्मी को तुलसी नहीं चढ़ाएँगे। पूजा के दौरान लक्ष्मी पंचाली का पाठ करना अनिवार्य है।
‘कोजागरी’ का अर्थ: ‘कोजागरी’ शब्द संस्कृत के शब्द ‘कः जागर’ से बना है, जिसका अर्थ है ‘कौन जाग रहा है?’। ऐसी मान्यता है कि इस रात को देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और देखती हैं कि कौन भक्त जागकर उनकी आराधना कर रहा है। देवी उन्हें आशीर्वाद देती हैं। हालाँकि, पूर्णिमा तिथि पर शाम के समय पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है।