‘डेड बॉडी तो दिला दो! SMS अस्पताल के ICU में भीषण आग, 8 से अधिक मरीज़ों की मौत, ‘तबाही के बाद चीख-पुकार!

प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के बाहर रविवार देर रात का दृश्य त्रासदी से कम नहीं था। ट्रॉमा सेंटर की दूसरी मंजिल पर बने आईसीयू वार्ड में शॉर्ट सर्किट से लगी भीषण आग और उसके बाद फैले जहरीले धुएं के कारण आधा दर्जन से अधिक मरीज़ों की दर्दनाक मौत हो गई।

हादसे के वक्त आईसीयू में करीब 24 मरीज़ भर्ती थे। आग की लपटें उठते ही पूरे अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। अपनी जान की परवाह किए बिना तिमारदार मरीजों को बेड समेत सड़क तक ले भागे। कई लोगों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।

हादसे के बाद अस्पताल के बाहर चीख-पुकार मची रही। जिन लोगों के अपने बच गए, वे उन्हें संभालने में लगे थे, लेकिन जिन्होंने अपनों को खोया, उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मृतक सर्वेश और दिलीप के परिजन बदहवास होकर एक-दूसरे से लिपटकर रो रहे थे। सर्वेश के परिजन बार-बार ‘डेड बॉडी तो दिला दो’ की गुहार लगा रहे थे।

कांस्टेबल हरिमोहन बने संकटमोचक: इस हादसे के बीच कांस्टेबल हरिमोहन कुछ मरीजों के लिए मसीहा बनकर आए। झगड़े की सूचना पर पहुंचे हरिमोहन ने बताया कि आग लगने के बाद चारों ओर ज़हरीला धुआं फैल गया, जिससे ज़्यादातर बेहोश मरीज़ बाहर नहीं निकल पाए। उन्होंने बिना देरी किए नर्सिंग स्टाफ और वार्ड बॉय के साथ मिलकर मरीज़ों को ट्रॉलियों और बेड सहित नीचे पहुंचाना शुरू किया, जिससे कई जानें बच गईं।

अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का गंभीर आरोप: मृतकों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शॉर्ट सर्किट की सूचना पहले ही दी गई थी, लेकिन उसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया। बार-बार कहने के बावजूद कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई। इसी लापरवाही के कारण यह बड़ा हादसा हुआ। मृतक दिलीप के परिजन ने बताया कि वह एक दिन बाद ही डिस्चार्ज होने वाला था।

सूचना मिलते ही दमकल की 10 गाड़ियां मौके पर पहुंची और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस घटना ने SMS जैसे प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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