भरतपुर के बरेठा बांध में सिंघाड़े की बंपर फसल, मीठे स्वाद के कारण दिल्ली और जयपुर के बाजारों तक बढ़ी मांग

जिले के प्रसिद्ध बरेठा बांध (Baretha Dam) और इसके आसपास के तालाबों में इन दिनों सिंघाड़े (Water Chestnut) की फसल अपने चरम पर है। लगभग दो से तीन महीने पहले किसानों ने सिंघाड़े की बेलें लगाई थीं, जो अब पूरी तरह तैयार हो चुकी हैं। इन दिनों किसान तालाबों में उतरकर सिंघाड़े की तुड़ाई में जुटे हुए हैं। इस बार फसल की अच्छी पैदावार से किसानों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही है।

मीठे स्वाद के कारण बाजारों में खास पहचान

बरेठा बांध और आसपास के तालाबों में बड़े पैमाने पर सिंघाड़े की खेती की जाती है। यहां के पानी की विशेषता के कारण यहां के सिंघाड़े मीठे, मुलायम और स्वादिष्ट होते हैं। यही कारण है कि भरतपुर का सिंघाड़ा न सिर्फ आसपास के जिलों में, बल्कि जयपुर और दिल्ली के बाजारों में भी अपनी खास पहचान बनाए हुए है। लोग इसके मीठे स्वाद और मुलायम बनावट के दीवाने हैं, जिससे इसकी मांग हर साल बढ़ती जा रही है।

किसान बताते हैं कि बरेठा का पानी बहुत अच्छा है, जो सिंघाड़े के स्वाद पर सीधा असर डालता है। यही वजह है कि यहां की फसल दूसरे इलाकों की तुलना में ज्यादा गुणवत्तापूर्ण होती है।

बाजारों में ताजे सिंघाड़े की आवक शुरू

इस समय बाजारों में ताजे सिंघाड़े की आवक शुरू हो चुकी है, जिससे स्थानीय हाट-बाजारों में फिर से रौनक लौट आई है। सिंघाड़े की खेती भरतपुर के कई किसानों के लिए महत्वपूर्ण आय का स्रोत बन गई है। सीमित लागत में अच्छी पैदावार होने से यह फसल किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है। कई किसान तालाब पट्टे पर लेकर इसकी खेती करते हैं और सीजन के अंत तक अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं।

फिलहाल बरेठा बांध और उसके आसपास के तालाबों में पानी की सतह पर हरे-भरे सिंघाड़ों की बेलें तैरती नजर आती हैं। सुबह के समय किसान नावों से तालाब में उतरकर फसल तोड़ते हैं और फिर उसे भरतपुर, रूपबास और बयाना के बाजारों में बेचने पहुंचते हैं। मीठे और स्वादिष्ट सिंघाड़ों की खुशबू इन दिनों भरतपुर के बाजारों में फैली हुई है।

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