‘रात में क्यों निकलना?’ CM ममता के बयान पर बवाल, पितृसत्ता के खिलाफ ‘अभया मंच’ की महिलाएं आज सड़कों पर!
कोलकाता: दुर्गापुर में एक निजी मेडिकल कॉलेज की ओडिशा की छात्रा के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म की जघन्य घटना के विरोध में ‘अभया मंच’ ने फिर से सड़कों पर उतरने का ऐलान किया है। आरजी कर दुष्कर्म और हत्या कांड के बाद गठित इस विरोध मंच ने आज, यानी 14 अक्टूबर, को आधी रात को ‘फिर से रात दखल’ (रात पर कब्ज़ा) अभियान का आह्वान किया है।
यह आंदोलन दुर्गापुर के दुष्कर्मियों के लिए सख्त सजा और त्वरित न्याय की मांग कर रहा है। मंच के अनुसार, विभिन्न व्यवसायों और समाज के सभी वर्गों की महिलाएँ, ट्रांसजेंडर और किन्नर आज रात 8 बजे जादवपुर के 8बी बस स्टैंड पर जमा होंगे। इसके बाद वे ‘रात दखल’ अभियान पर निकलेंगे।
दुर्गापुर में निजी मेडिकल कॉलेज की 23 वर्षीय द्वितीय वर्ष की छात्रा के साथ 10 अक्टूबर की रात सामूहिक दुष्कर्म की शिकायत हुई थी। वह अभी भी दुर्गापुर के अस्पताल में इलाजरत हैं। इस घटना के बाद राज्यपाल सीवी आनंद बोस भी उनसे मिलने गए थे। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में कुल पाँच लोगों को हिरासत में लिया गया है।
मुख्यमंत्री के बयान पर विवाद और प्रदर्शन का आह्वान
इस गैंगरेप मामले पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ‘रात में बाहर न निकलने’ संबंधी बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया था। मुख्यमंत्री ने कहा था, “निजी मेडिकल कॉलेजों की भी जिम्मेदारी है कि वे छात्रों, खासकर छोटी लड़कियों को रात में बाहर न निकलने दें… क्योंकि पुलिस घर-घर जाकर नहीं बैठ सकती।”
मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी को लेकर ही ‘अभया मंच’ ने विरोध तेज कर दिया है। मंच की सदस्य, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता शताब्दी दास ने कहा, “हम आरजी कर जैसी घटनाओं के लिए भी सड़कों पर उतरे हैं, लेकिन स्थिति नहीं बदली है। हमारा यह विरोध उसी पितृसत्तात्मक, misogynistic (महिला-द्वेषी) मानसिकता के खिलाफ है, जहाँ महिलाओं को सूरज डूबने के बाद घर के अंदर रहने को कहा जाता है। महिलाओं की आज़ादी को रोकने के बजाय पुलिस सड़कों पर गश्त क्यों नहीं बढ़ाती?”
‘अभया मंच’ ने स्पष्ट किया है कि डॉक्टर समेत राज्य की महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं। प्रशासन सोया हुआ है। इसलिए महिलाएँ, ट्रांसजेंडर और किन्नर किसी भी समय सड़कों पर सुरक्षित रहें, इसके लिए वे फिर से सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।