चांदी में निवेश का महामुकाबला: फिजिकल, डिजिटल या ETF? किस पर कितना कैपिटल गेन टैक्स?
धनतेरस और दिवाली जैसे-जैसे नज़दीक आ रही हैं, भारत में सोने-चांदी की खरीददारी ज़ोर पकड़ रही है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन त्योहारों पर बहुमूल्य धातुएं खरीदना शुभ माना जाता है। इस बार निवेश के लिहाज़ से चांदी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जहां सोने की कीमतों में तेज़ी आई है, वहीं चांदी ने पिछले एक साल में करीब ९०% की शानदार बढ़त दर्ज की है। मंगलवार को चांदी की कीमत $6,000 की तेज़ी के साथ $1,85,000 प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) के अपने अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इस रिकॉर्ड उछाल के बीच, धनतेरस पर चांदी खरीदने या बेचने से पहले आपको इस पर लगने वाले टैक्स नियमों को समझना बेहद ज़रूरी है।
चांदी में निवेश के तरीके और टैक्स नियम
भारतीय टैक्स कानूनों के तहत, चांदी को एक ‘पूंजीगत संपत्ति’ (Capital Asset) माना जाता है। इसका अर्थ है कि चांदी बेचने से होने वाले मुनाफ़े पर ‘कैपिटल गेन टैक्स’ (Capital Gain Tax) लगता है।
१. फिजिकल चांदी (सिक्के, बार और ज्वेलरी)
- लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG): २४ महीने या उससे अधिक समय तक होल्ड करने पर १२.५% की दर से एलटीसीजी टैक्स लगता है।
- शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG): २४ महीने से पहले बेचने पर आयकर स्लैब दरों के अनुसार एसटीसीजी टैक्स लगता है।
- अन्य शुल्क: खरीददारी के समय ३% जीएसटी (GST) और मेकिंग चार्ज + जीएसटी अतिरिक्त देना होता है।
२. डिजिटल चांदी डिजिटल चांदी पर भी टैक्स के नियम फिजिकल चांदी के समान ही हैं। इस पर ३% जीएसटी और प्लेटफॉर्म फीस या स्टोरेज चार्जेज लागू होते हैं।
३. सिल्वर ईटीएफ (Silver ETF)
- लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG): १२ महीने या उससे अधिक समय तक होल्ड करने पर १२.५% की दर से एलटीसीजी टैक्स लगता है।
- शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG): १२ महीने से कम समय के लिए रखने पर आयकर स्लैब के अनुसार एसटीसीजी टैक्स लगता है।
- अन्य शुल्क: इस पर जीएसटी नहीं लगता, लेकिन ब्रोकरेज, सेबी (SEBI) फीस और एक्सचेंज चार्जेज लागू होते हैं।
प्रमुख सिल्वर ईटीएफ का रिटर्न (१ साल में/ ३ साल में)
- आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल सिल्वर: ९०%/१९९%
- एक्सिस सिल्वर: १०२%/२१५%
- निप्पॉन इंडिया सिल्वर: ९८%/२०८%
- एचडीएफसी सिल्वर: ९९%/२१७%
- आदित्य बिड़ला सिल्वर: १००%/२१२%