डॉक्टर की जमानत अर्जी पर 16 अक्टूबर को हाईकोर्ट में सुनवाई; राज्य सरकार करेगी पुरजोर विरोध
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कोल्ड्रिफ कफ सिरप से हुई 25 मासूमों की मौत के मामले में एसआईटी (SIT) ने बड़ी कार्रवाई की है। एसआईटी टीम ने श्रीसन फार्मास्युटिकल कंपनी की 61 वर्षीय केमिकल एनालिस्ट के. महेश्वरी को कांचीपुरम, चेन्नई से गिरफ्तार किया है।
छिंदवाड़ा पुलिस अब तक कंपनी के मालिक जी रंगनाथन और बच्चों को दवा लिखने वाले डॉक्टर प्रवीण सोनी सहित कई जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। फिलहाल, रंगनाथन 10 दिन की पुलिस रिमांड पर है, जिसे पूछताछ के बाद 20 अक्टूबर को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
जबलपुर जोन के आईजी प्रमोद वर्मा ने बताया कि एसआईटी रंगनाथन को लेकर तमिलनाडु के कांचीपुरम और चेन्नई स्थित फैक्ट्री पहुंची थी, जहां उत्पादन से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाई गईं। अब छिंदवाड़ा लौटने के बाद एसआईटी उनसे सिरप के निर्माण, वितरण और सबसे अहम, गुणवत्ता नियंत्रण (क्वालिटी कंट्रोल) प्रक्रिया पर विस्तृत पूछताछ करेगी।
के. महेश्वरी की संदिग्ध भूमिका
पुलिस के अनुसार, केमिकल एनालिस्ट के. महेश्वरी की भूमिका इस पूरे मामले में सबसे संदिग्ध है। फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाले सभी केमिकल और गुणवत्ता की देखरेख की जिम्मेदारी उन्हीं के हाथों में थी। किस बैच में कितना केमिकल मिलाना है, यह सब के. महेश्वरी की निगरानी में ही तय होता था।
रंगनाथन ने पूछताछ में एसआईटी को बताया कि सभी दवाइयां के. महेश्वरी की देखरेख में ही तैयार होती थीं। रंगनाथन के इस बयान के बाद ही एसआईटी महेश्वरी की गिरफ्तारी के लिए कांचीपुरम पहुंची।
लाइसेंस रद्द और हाईकोर्ट में जमानत
इस बीच, तमिलनाडु सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए श्रीसन फार्मास्युटिकल कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया है। वहीं, जबलपुर के ड्रग और औषधि विभाग ने कटारिया फार्मास्युटिकल का भी लाइसेंस निरस्त करते हुए गोडाउन और दुकान को सील कर दिया है।
गौरतलब है कि इस घटना के बाद मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया था। जांच में सामने आया कि मृत अधिकांश बच्चों को वही कोल्ड्रिफ कफ सिरप दिया गया था, जिसकी पर्ची डॉक्टर प्रवीण सोनी ने लिखी थी। डॉक्टर सोनी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। निचली अदालत से जमानत खारिज होने के बाद, उन्होंने अब जबलपुर हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है, जिस पर 16 अक्टूबर को सुनवाई होगी। राज्य सरकार इस याचिका का पुरजोर विरोध करने की तैयारी में है। सरकारी पक्ष का तर्क है कि यह सामान्य लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अपराध है, क्योंकि इसमें निर्दोष बच्चों की जान गई है।
स्वास्थ्य विभाग और दवा नियामक संस्थाओं की संयुक्त रिपोर्ट में भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में पाया गया कि सिरप के नमूने मानक परीक्षण में फेल हुए और फार्मेसी स्तर पर गुणवत्ता नियंत्रण नियमों की खुली अनदेखी की गई थी। आईजी प्रमोद वर्मा ने कहा है कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।