दिवाली: खुशियों के साथ-साथ समृद्धि लाएगा यह पर्व! धन-दौलत के लिए करें ये सरल और अचूक उपाय, 3 दिन की साधना से मिलेगी महालक्ष्मी की कृपा
दिवाली का पर्व रोशनी, खुशियों और हर्षोल्लास का उत्सव है। यह त्योहार भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास के बाद रावण का वध कर अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है। प्रभु के स्वागत में अयोध्यावासियों ने पूरी नगरी को दीपों से सजाया था, तभी से यह दीपोत्सव का पर्व धनतेरस से शुरू होकर लगातार पाँच दिनों तक चलता है।
इस पावन पर्व पर सुख-समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी और प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा-अर्चना का विधान है। अगर आप भी अपने घर में धन-धान्य और खुशहाली बनाए रखना चाहते हैं, तो दीपावली पर बताए गए ये चमत्कारी उपाय अवश्य करें:
लक्ष्मी-प्राप्ति की विशेष साधना और उपाय:
- मुख्य द्वार पर जलाएँ अखंड दीपक: दीपावली की रात घर के मुख्य दरवाजे के दाहिनी और बाईं ओर गेहूँ की छोटी-छोटी ढेरी बनाकर उस पर दो दीपक जलाएँ। यदि संभव हो, तो ये दीपक पूरी रात जलते रहने चाहिए। ऐसा करने से आपके घर में सुख-संपत्ति की वृद्धि होती है।
- दीपक से जुड़ी महत्वपूर्ण बात: मिट्टी के कोरे (नए) दीये में तेल या घी सीधा नहीं डालना चाहिए, क्योंकि वे तेल सोख लेते हैं। दीयों को इस्तेमाल करने से पहले कम से कम 6 घंटे पानी में भिगोकर रखें और फिर सुखाकर इस्तेमाल करें।
- तीन दिन की गुप्त साधना: महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए एक अत्यंत सरल और प्रभावी उपाय केवल तीन दिनों तक—दीपावली से लेकर भाईदूज तक—करें।
- एक स्वच्छ कमरे में गाय के गोबर से बनी अगरबत्ती/धूप या गाय के घी का दीपक जलाएँ।
- पीले वस्त्र धारण करें और ललाट पर केसर का तिलक लगाएँ।
- इसके बाद, स्फटिक मोतियों से बनी मालाओं से नीचे दिए गए महालक्ष्मी मंत्र का कम से कम दो माला (216 बार) जाप करें।
महालक्ष्मी का विशेष मंत्र:
ॐनमोभाग्यलक्ष्म्यैचविद्महै।
अष्टलक्ष्म्यैचधीमहि।तन्नोलक्ष्मीःप्रचोदयात्॥
- मंगलकारी तोरण (बंदनवार) सजाएँ: प्रवेश द्वार के ऊपर नीम, आम, या अशोक आदि के पत्तों का तोरण (बंदनवार) बाँधना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। अशोक और नीम के पत्तों में रोग प्रतिरोधक शक्ति भी होती है, जो घर में सकारात्मकता लाती है।
इन उपायों को श्रद्धापूर्वक करने से माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा बनी रहती है और आपके घर में धन, वैभव और सुख का वास होता है।