दिवाली की खुशियों के बीच ‘मौत का जाल’! सोशल मीडिया ट्रेंड की वजह से ‘कार्बाइड गन’ ने छीन ली 200 बच्चों की आंखों की रोशनी

दिवाली की खुशियों के बीच ‘मौत का जाल’! सोशल मीडिया ट्रेंड की वजह से ‘कार्बाइड गन’ ने छीन ली 200 बच्चों की आंखों की रोशनी

दीपावली के जश्न के बीच सोशल मीडिया पर एक फन ट्रेंड ने देशव्यापी, खासकर मध्य प्रदेश में, खतरनाक रूप ले लिया है। हम बात कर रहे हैं देसी जुगाड़ से बनी ‘कार्बाइड गन’ की, जिसे आम बोलचाल में लोग ‘कार्बाइड बम’ या ‘कार्बाइड क्रैकर’ भी कहते हैं। इसकी वजह से देश के कई राज्यों में बच्चों की आंखों में गंभीर चोटें आई हैं।

क्या है यह कार्बाइड बम? यह देसी गन प्लास्टिक पाइप, गैस लाइटर और कैल्शियम कार्बाइड से मिलकर बनाई जाती है। पाइप में भरा कैल्शियम कार्बाइड जब पानी से मिलता है तो एसिटिलीन गैस पैदा होती है। इसमें एक छोटी सी चिंगारी मिलते ही तेज और अनियंत्रित धमाका होता है।

आंखों, कॉर्निया और नर्वस सिस्टम के लिए घातक विस्फोट होने और पाइप टूटने पर निकलने वाले प्लास्टिक के छोटे छर्रे सीधे शरीर में, खासकर आंखों में घुसकर गंभीर चोटें पहुंचाते हैं। इससे चेहरे, आंखों और कॉर्निया को गंभीर क्षति पहुंचती है, साथ ही यह दिमाग और नर्वस सिस्टम के लिए भी जानलेवा हो सकता है। कई मामलों में लोगों की आंख की पुतली फटने तक की स्थिति बन गई, जिसकी वजह से उन्हें तुरंत सर्जरी करानी पड़ी।

AIIMS विशेषज्ञ का अलर्ट: आंखों की सतह जला देते हैं रासायनिक तत्व एम्स भोपाल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. भावना शर्मा ने बताया कि एम्स भोपाल में इसके कई मामले आए हैं। आठ मरीजों का एम्नियोटिक झिल्ली प्रत्यारोपण (Amniotic Membrane Transplant) किया जा रहा है, ताकि आंख की क्षतिग्रस्त सतह को ठीक किया जा सके। अभी तक आठ मरीजों की सर्जरी हो चुकी है और बाकी का इलाज जारी है। उनका कहना है कि समय पर इलाज से कई मामलों में रोशनी बचाई जा सकती है।

‘जानलेवा खिलौने’ के लिए ‘चैलेंज’ जिम्मेदार इस खतरनाक ट्रेंड के लिए मुख्य रूप से इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब की वीडियो जिम्मेदार हैं। वीडियो देखकर ही बच्चों के बीच इसे बनाने और चलाने की होड़ देखने को मिली है। इससे वे न सिर्फ अपनी बल्कि दूसरों की जिंदगी को भी खतरे में डाल रहे हैं।

मध्य प्रदेश में ‘कार्बाइड’ गन का कहर देसी जुगाड़ से बनी कार्बाइड गन इस समय मध्य प्रदेश में जमकर कहर बरपा रही है। भोपाल, विदिशा, ग्वालियर और इंदौर में अब तक 200 से अधिक बच्चे घायल होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। इस दौरान कई की आंखों की रोशनी स्थायी रूप से जा चुकी है, जबकि कुछ के चेहरे भी बुरी तरह झुलस गए हैं।

बचाव और सावधानी: डॉ. शर्मा के अनुसार, कार्बाइड पटाखों में अत्यधिक रासायनिक तत्व होते हैं जो आंखों की सतह को जला देते हैं। ऐसे में तुरंत पानी से आंख धोनी चाहिए और एक आंख बंद करके यह जांचें कि रोशनी दिखाई दे रही है या नहीं। अगर जलन, दर्द या धुंधलापन महसूस हो तो देर न करें और तुरंत नजदीकी नेत्र अस्पताल जाएं। पटाखे फोड़ते समय सुरक्षात्मक चश्मे का इस्तेमाल करें और कार्बाइड जैसे रासायनिक पटाखों से बचें।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *