अमेरिकी-यूरोपीय प्रतिबंधों के बाद भारत रूस से तेल आयात घटाने की तैयारी में, रिलायंस समेत सरकारी रिफाइनर कर रहे समीक्षा

नई दिल्ली: अमेरिका और यूरोप द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों के बाद भारत अपनी सबसे बड़ी आपूर्ति रूस से कच्चे तेल के आयात को तेजी से कम करने की तैयारी में है। रॉयटर्स की गुरुवार को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, देश के प्रमुख निजी खरीदार रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने मॉस्को से कच्चे तेल के आयात को काफी हद तक कम करने या पूरी तरह रोकने की योजना बनाई है। सरकारी रिफाइनर भी अपनी खरीद योजनाओं का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। यह सब तब हो रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि भारत इस साल तक पूरी तरह रूसी तेल आयात बंद कर देगा।
प्रतिबंधों का तत्काल प्रभाव यह निर्णय यूक्रेन संघर्ष के कारण अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा रूसी ऊर्जा कंपनियों रोसनेफ्ट (Rosneft) और लुकोइल (Lukoil) पर लगाए गए अतिरिक्त प्रतिबंधों के बाद आया है।
- समय सीमा: अमेरिकी ट्रेजरी ने कंपनियों को 21 नवंबर तक रोसनेफ्ट और लुकोइल के साथ लेनदेन समाप्त करने का समय दिया है।
- अमेरिकी दबाव: यह बदलाव तब हो रहा है जब भारत को अमेरिकी निर्यात पर 50% टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें आधे टैरिफ रूसी तेल खरीद के जवाब में लगाए गए हैं।
भारतीय रिफाइनरों की रणनीति
- रिलायंस: 2022 से रूसी तेल का सबसे बड़ा आयातक रहा रिलायंस अब सरकारी नीति दिशानिर्देशों के अनुरूप अपनी खरीद पैटर्न को समायोजित करने की योजना बना रहा है। रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रिलायंस तेजी से कटौती करने जा रहा है।
- सरकारी रिफाइनर: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड जैसे सरकारी रिफाइनर अपनी रूसी तेल खरीद की समीक्षा कर रहे हैं ताकि रोसनेफ्ट या लुकोइल से सीधे कोई आपूर्ति न हो।
- रिपोर्ट के अनुसार, यह एक बड़ी कटौती होगी, लेकिन आयात तुरंत शून्य नहीं होगा क्योंकि कुछ कार्गो 21 नवंबर से पहले पहुंच जाएंगे।
ट्रंप का दावा और वैश्विक प्रतिक्रिया
- ट्रंप ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत का जिक्र करते हुए दावा किया कि भारत वर्ष के अंत तक रूसी तेल आयात को लगभग शून्य कर देगा।
- भारत की रूसी तेल आयात समीक्षा की खबरों के बीच गुरुवार को तेल कीमतों में लगभग 3% की तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $64.53 प्रति बैरल पर पहुंच गया। जानकारों का कहना है कि यदि भारत रूसी तेल खरीद कम करता है तो एशियाई मांग अमेरिकी क्रूड की ओर मुड़ सकती है, जिससे कीमतें बढ़ेंगी।
आगे की राह सरकारी रिफाइनर अपनी आपूर्ति व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं ताकि रोसनेफ्ट या लुकोइल से कोई सीधी खेप न आए। सीधे रोसनेफ्ट से सौदा करने वाला निजी रिफाइनर रिलायंस अब मध्य पूर्व और अफ्रीका के वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की ओर रुख कर सकता है।