अंता उपचुनाव, कांग्रेस ने अशोक चांदना को बनाया चुनाव प्रभारी, ३६ नेताओं की टीम मैदान में

अंता उपचुनाव, कांग्रेस ने अशोक चांदना को बनाया चुनाव प्रभारी, ३६ नेताओं की टीम मैदान में

राजस्थान के अंता विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने इस उपचुनाव में जीत हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता अशोक चांदना को चुनाव प्रभारी बनाकर एक मजबूत रणनीतिक दांव खेला है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने ३६ नेताओं की टीम गठित की है, जो मंडल स्तर से लेकर ग्राम पंचायत तक हर स्तर पर रणनीति को लागू करने में जुटी है।

कांग्रेस की इस रणनीति से अंता उपचुनाव में कांटे की टक्कर मानी जा रही है। चांदना हाड़ौती के कद्दावर नेता माने जाते हैं, उनकी संगठनात्मक क्षमता और क्षेत्र में लोकप्रियता कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है। उनकी नियुक्ति से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हुआ है।

मंडल स्तर पर सूक्ष्म रणनीति

कांग्रेस ने उपचुनाव में सूक्ष्म स्तर पर काम करने के लिए मंडलवार प्रभारियों की नियुक्ति की है। विधायक सीएल प्रेमी और चेतन पटेल कोलाना को सह-प्रभारी बनाया गया है, जो चांदना के नेतृत्व में काम करेंगे।

  • महिला और माइनॉरिटी वोटरों पर विशेष ध्यान: महिला जनसंपर्क की जिम्मेदारी पूर्व मंत्री शकुंतला रावत, विधायक शिखा मील बराला सहित ६ महिला नेताओं को सौंपी गई है। माइनॉरिटी वोटरों को जोड़ने की जिम्मेदारी एमडी चौपदार और अमीन पठान को दी गई है।
  • विभिन्न नगर पालिकाओं और मंडलों के लिए भी अनुभवी नेताओं को प्रभारी बनाया गया है, जैसे मांगरोल नगर पालिका के लिए पुष्पेंद्र भारद्वाज और अंता नगर पालिका के लिए पूर्व विधायक पानाचंद मेघवाल।

बीजेपी की रणनीति को चुनौती और त्रिकोणीय मुकाबला

अंता उपचुनाव राजस्थान की राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। जहां बीजेपी अपनी पूरी ताकत लगा रही है, वहीं कांग्रेस की यह नई रणनीति और अशोक चांदना जैसे अनुभवी नेता की नियुक्ति बीजेपी के लिए चुनौती बन सकती है।

अंता विधानसभा सीट पर २७ अक्टूबर को नामांकन वापसी के बाद मुकाबला स्पष्ट हो गया है। कांग्रेस के बागी नरेश मीणा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। अब कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया, बीजेपी के मोरपाल सुमन और निर्दलीय नरेश मीणा के बीच मुख्य टक्कर मानी जा रही है। कांग्रेस की रणनीति स्थानीय मुद्दों पर फोकस, महिला और अल्पसंख्यक वोटरों को जोड़ने और संगठन को मजबूत करने पर केंद्रित है।

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