असम CM हिमंत ने कर्नाटक के कांग्रेस नेता को लताड़ा! प्रियंका खड़गे पर मानहानि का केस क्यों करेगी असम सरकार?

कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियंका खड़गे के एक बयान को लेकर असम में जबरदस्त राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। खड़गे ने कथित तौर पर कहा था, “असम में उद्योग स्थापित करने लायक योग्य और प्रतिभाशाली लोग नहीं हैं।” इस टिप्पणी पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सीधे तौर पर प्रियंका खड़गे को “फर्स्ट क्लास इडियट” करार दिया।
हिमंत ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “यह टिप्पणी असम के युवाओं का अपमान है। कांग्रेस ने अभी तक इस बयान की निंदा नहीं की है। हम प्रियंका खड़गे के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने की सोच रहे हैं, क्योंकि उन्होंने कहा है कि असम में शिक्षित युवा नहीं हैं। यह हमारे राज्य के हर युवा की गरिमा का अपमान है।” उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस की यह टिप्पणी उनके “गहरे अहंकार और अज्ञानता” को दर्शाती है, क्योंकि वे आज भी नहीं समझ पाए हैं कि असम की युवा पीढ़ी आज प्रशासन, उद्यम, शिक्षा और नवाचार में देश में शीर्ष पर है।
इससे पहले, बीजेपी के राज्य कार्यालय ‘वाजपेयी भवन’ में पार्टी प्रवक्ता जयंत कुमार गोस्वामी ने भी खड़गे के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी असम के लोगों के आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचाती है और कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई को चुनौती दी कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे प्रियंका खड़गे के बयान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करें।
जयंत गोस्वामी ने यह भी दावा किया कि “कांग्रेस पार्टी का इतिहास ही असम को अपमानित करने का इतिहास रहा है।” उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान जवाहरलाल नेहरू के “असम छोड़ो” वाले रवैये का जिक्र किया, जो यह साबित करता है कि उन्होंने कभी इस राज्य को महत्व नहीं दिया। उन्होंने 1971 के बांग्लादेश युद्ध के दौरान इंदिरा गांधी के फैसले से 40 लाख अवैध प्रवासियों के आगमन और राजीव गांधी के असम समझौते की 1971 की कट-ऑफ तारीख को भी याद दिलाया, जिससे स्थानीय नागरिकों के अधिकारों को बड़ा झटका लगा था। उन्होंने राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के नक्शे से उत्तर-पूर्व को कथित रूप से बाहर रखने के विवाद का भी उल्लेख किया। गोस्वामी ने कहा, “अपमानों की यह निरंतरता अब प्रियंका खड़गे के बयान में फिर से स्पष्ट हुई है। कांग्रेस आज भी असम के सम्मान और क्षमता को हल्के में लेती है।”
बीजेपी नेताओं ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम का युवा आज शिक्षा, प्रशासन, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता में पूरे भारत में मिसाल कायम कर रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह विवाद आने वाले दिनों में कांग्रेस के खिलाफ बीजेपी का एक बड़ा चुनावी हथियार बनेगा, खासकर युवा मतदाताओं के बीच यह मुद्दा व्यापक असर डाल सकता है।