शोलों के ‘जेलर’ नहीं रहे! लीजेंड एक्टर असरानी का निधन, दिवाली के दिन हिंदी सिनेमा ने खोया अपना ‘कॉमेडी किंग’

भारतीय फिल्म जगत की प्रसिद्ध हस्ती गोवर्धन असरानी (Govardhan Asrani) का निधन हो गया है। २० अक्टूबर, २०२५ (दीपावली के दिन) को मुंबई के एक अस्पताल में इलाज़ के दौरान उन्होंने अंतिम साँस ली। उनके निधन से फिल्म जगत और प्रशंसकों को अपूरणीय क्षति हुई है।

असरानी, जिनका जन्म १ जनवरी १९४१ को जयपुर के एक सिंधी हिंदू परिवार में हुआ था, लगभग पाँच दशक से अधिक के शानदार करियर में एक प्रतिष्ठित हास्य और चरित्र अभिनेता के रूप में स्थापित रहे। उनकी असली और अमिट पहचान १९७५ की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ से बनी थी, जहाँ ‘हम अंग्रेजों के ज़माने के जेलर हैं’ डायलॉग ने उन्हें अमर कर दिया। उन्होंने ३५० से अधिक हिंदी और गुजराती फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेरा।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी: अभिनय को पेशेवर रूप से अपनाने के लिए असरानी ने १९६४ में एफटीआईआई (FTII), पुणे में दाखिला लिया। उनकी पहली फिल्म ‘हरे कांच की चूड़ियां’ (१९६७) थी, लेकिन उन्हें पहचान १९७१ की फिल्म ‘गुड्डी’ से मिली। उन्होंने ‘चितचोर’, ‘चुपके चुपके’, ‘नमक हराम’, और ‘गोलमाल’ जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया।

असरानी ने अभिनेता के अलावा गायक, निर्देशक (पहली फिल्म ‘ओस की बूंद’, १९७७) और लेखक के रूप में भी काम किया। उनकी हास्य शैली उच्च कोटि की और पारिवारिक मनोरंजन से परिपूर्ण होती थी। अभिनेता राजेश खन्ना से उनकी खास मित्रता थी और दोनों ने लगभग २५ फिल्मों में एक साथ काम किया। नब्बे के दशक में उन्होंने ‘हम पांच’ और ‘श्रीमान-श्रीमती’ जैसे लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिकों में भी काम किया। दिग्गज अभिनेता असरानी ने भले ही दुनिया को अलविदा कह दिया हो, लेकिन अपनी हास्य कला की अमिट छाप के दम पर वह हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेंगे।


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