NRC विवाद में नया मोड़! क्या फर्जी है प्रदीप कर का सुसाइड नोट? भाजपा ने जारी की 2002 की वोटर लिस्ट, मानसिक तनाव का दावा
अगरपाड़ा निवासी प्रदीप कर की आत्महत्या और उनके पास से मिले ‘मेरी मौत के लिए NRC जिम्मेदार’ वाले सुसाइड नोट को लेकर राज्य की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। जहां तृणमूल इस घटना को NRC आतंक का नतीजा बताकर केंद्र और आयोग पर हमला कर रही है, वहीं भाजपा ने मृतक के मानसिक तनाव का दावा पेश किया है।
भाजपा की ओर से दावा किया गया है कि प्रदीप कर का नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज है, जिसका दस्तावेज़ भी उन्होंने सामने रखा है। पानीहाटी के बीजेपी नेता चंडीचरण राय ने कहा, “कमीशन के नियमानुसार प्रदीप का नाम वोटर लिस्ट से बाहर होने का कोई कारण नहीं है। जहां तक मुझे पता है, वह मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। मैंने सुना है कि उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी समस्या थी।” उन्होंने तृणमूल पर ‘अपनी कमजोरी छिपाने के लिए दुष्प्रचार’ करने का आरोप लगाया।
हस्तलेखन पर गंभीर सवाल:
भाजपा ने इस घटना के सबसे सनसनीखेज पहलू पर सवाल उठाया है— बरामद हुए सुसाइड नोट की लिखावट। मृतक के बहनोई उत्तम हाजरा ने बताया कि एक दुर्घटना में प्रदीप कर के दाहिने हाथ की चार उंगलियां कट गई थीं। इस स्थिति में, भाजपा ने मांग की है कि बरामद हुए नोट के हस्तलेखन की जाँच की जाए। चंडीचरण राय ने एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में इस घटना की जांच की मांग भी की है।
इस बीच, तृणमूल अध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “क्या बीजेपी उनके मन के अंदर जानती थी? क्या बीजेपी घर जाकर वोटर लिस्ट देकर आई थी? बीजेपी और चुनाव आयोग ने मिलकर लोगों में डर पैदा किया है।”
गौरतलब है कि सोमवार को अगरपाड़ा में 57 वर्षीय बुजुर्ग प्रदीप कर का लटका हुआ शव मिलने के बाद से ही राजनीति गरमाई हुई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने तीखा गुस्सा व्यक्त किया है। जिस समय अभिषेक बनर्जी बुधवार दोपहर खुद प्रदीप कर के घर जाकर परिजनों से मिलने वाले हैं, ठीक उसी समय बीजेपी का यह पलटवार टकराव को और बढ़ा गया है।