गोमूत्र बना चमत्कारी कीटनाशक! सुबह 7 से 10 बजे तक छिड़काव से पेड़ रहते हैं हरे-भरे
दौसा। राजस्थान के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ नवाचार की राह पर भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। दौसा के सिकराय क्षेत्र के किसान गिर्राज प्रसाद मीणा ने अपने नींबू के बगीचे को कीटों से बचाने के लिए गोमूत्र आधारित प्राकृतिक तकनीक अपनाकर एक बड़ी मिसाल पेश की है। यह नवाचार उनके खेत को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहा है।
देसी तकनीक से चमत्कारी परिणाम: पूरी तरह जैविक खेती करने वाले गिर्राज मीणा ने रासायनिक कीटनाशकों के विकल्प के रूप में गोमूत्र को चुना। उन्होंने १५ लीटर पानी में १ लीटर गाय का गोमूत्र मिलाकर नींबू के पेड़ों पर नियमित अंतराल पर छिड़काव किया। इस देसी प्रयोग से कुछ ही दिनों में पेड़ों पर लगे सभी कीड़े-मकोड़े और जाले पूरी तरह समाप्त हो गए, जिससे पेड़ों को नई ज़िंदगी मिली।
उत्पादन और मिट्टी को लाभ: किसान मीणा का कहना है कि गोमूत्र में कई ऐसे प्राकृतिक तत्व होते हैं जो कीटों के लिए हानिकारक, जबकि पौधों और मिट्टी के लिए पोषक होते हैं। गोमूत्र के छिड़काव के बाद नींबू के पेड़ न केवल हरे-भरे बने रहे, बल्कि उनकी उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
छिड़काव का सही समय: किसान मीणा अन्य किसानों को सलाह देते हैं कि छिड़काव का सबसे उपयुक्त समय सुबह ७ से १० बजे और शाम ५ बजे से रात तक है, जब धूप की तीव्रता कम हो। उनका कहना है कि १५:१ (पानी: गोमूत्र) मिश्रण का अनुपात रखना सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। यह नवाचार किसानों के रासायनिक खर्च में कमी और शुद्ध, स्वस्थ उत्पादन सुनिश्चित कर रहा है।