देश के सबसे बड़े परमाणु केंद्र BARC में नकली वैज्ञानिक! संदिग्ध न्यूक्लियर डेटा और 12 से अधिक मैप के साथ मुंबई में ‘अख्तर’ गिरफ्तार!
देश के शीर्ष परमाणु अनुसंधान केंद्र, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) में एक नकली वैज्ञानिक की गिरफ्तारी ने देश की सुरक्षा एजेंसियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। मुंबई पुलिस ने पिछले हफ्ते एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसके पास से संदिग्ध परमाणु डेटा, एक दर्जन से अधिक मैप्स और कई जाली पहचान पत्र बरामद किए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मुंबई के वर्सोवा इलाके से पिछले हफ्ते अख्तर कुतुबुद्दीन हुसैनी को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में पता चला कि वह खुद को कभी अली रजा हुसैनी तो कभी अलेक्जेंडर पामर बताकर पेश करता था।
पुलिस ने उसके पास से निम्नलिखित चीजें बरामद की हैं:
- कई जाली पासपोर्ट
- फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड
- नकली BARC पहचान पत्र
जांचकर्ता अब जब्त किए गए दस्तावेजों और मैप्स की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि उनमें कोई गोपनीय या संवेदनशील जानकारी है या नहीं।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का संदेह
जांच सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी से पहले के महीनों में हुसैनी ने कई अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल किए थे। उसके कॉल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। पुलिस को संदेह है कि उसका संपर्क विदेशी नेटवर्क से था, जिसका संबंध इन संदिग्ध परमाणु डेटा से हो सकता है।
पुलिस जांच में पता चला है कि हुसैनी का पहचान बदलने का इतिहास काफी पुराना है। 2004 में दुबई में उसने खुद को ‘गोपनीय दस्तावेज वाला वैज्ञानिक’ बताया था, जिसके बाद उसे देश वापस भेज दिया गया था। लेकिन वह रुका नहीं। उसने फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल करके बाद में दुबई, तेहरान और कई अन्य स्थानों की यात्रा की थी।
फर्जी पासपोर्ट और भाई का कनेक्शन
जाली दस्तावेज़ बनाने के इस रैकेट की जांच में झारखंड के रहने वाले मुनाज्ज़िल खान का नाम सामने आया है। पता चला है कि मुनाज्ज़िल खान ने अख्तर के भाई के लिए दो पासपोर्ट जाली किए थे। ये पासपोर्ट हुसैनी मुहम्मद आदिल और नसीमउद्दीन सैयद आदिल हुसैनी के नाम पर बनाए गए थे।
पुलिस को शक है कि अख्तर और उसका भाई आदिल दोनों ही नकली पहचान पत्रों और जाली दस्तावेजों का उपयोग करके विदेशों में यात्रा करते थे। जांच से पता चला है कि अख्तर के भाई आदिल हुसैनी को भी हाल ही में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसी ने कथित तौर पर अख्तर को मुनाज्ज़िल खान से संपर्क कराया था।
पुलिस को गुमराह करने के लिए अख्तर ने पूछताछ के दौरान दावा किया था कि उसका भाई सालों पहले मर चुका है। लेकिन जांच में पता चला कि उसका भाई आदिल जीवित है और इस गिरोह में सक्रिय है। पुलिस ने इस मामले में मुनाज्ज़िल खान के भाई इलियास खान की भी पहचान की है, जो फिलहाल फरार है। आरोप है कि इलियास ने ही अख्तर हुसैनी को फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र, स्कूल और कॉलेज की डिग्रियां मुहैया कराई थीं।