६ महीने बाद चीन ने भारत को दिया ‘दुर्लभ खनिज’, शी जिनपिंग ने रखी सीक्रेट शर्त, क्या मानेंगी भारतीय कंपनियां?
नई दिल्ली: चीन ने ६ महीने के अंतराल के बाद भारत सहित दुनिया के कुछ देशों को ‘दुर्लभ खनिज’ (Rare Earth Minerals) का निर्यात फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल पावर) सहित विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट बनाने वाली भारतीय कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।
दुनिया भर में दुर्लभ खनिज आपूर्ति में चीन नंबर वन है। लेकिन हाल ही में, उन्होंने इसके निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगाए थे, जिससे वैश्विक चिंता बढ़ गई थी। मीडिया सूत्रों के अनुसार, बीजिंग ने दुर्लभ खनिज निर्यात की अनुमति देने से पहले भारतीय कंपनियों से ‘एंड-यूजर सर्टिफिकेट’ मांगा था। इसकी जांच के बाद ही अनुमति दी गई।
चीन की शर्त क्या है?
इस खनिज आपूर्ति को फिर से शुरू करने के बदले में चीन ने एक महत्वपूर्ण शर्त रखी है। चीन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि इन खनिजों को अमेरिका नहीं भेजा जाएगा और न ही इनका उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। अगर इन शर्तों का पालन नहीं किया गया, तो बीजिंग किसी भी समय निर्यात को फिर से रोक सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ फिलहाल इस मुद्दे पर ज़्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं।
ट्रंप-जिनपिंग समझौते के बाद खुशखबरी:
दुर्लभ खनिज निर्यात पर रोक के बाद चीन और अमेरिका के बीच टकराव शुरू हो गया था। अमेरिका ने चीनी उत्पादों पर टैरिफ (शुल्क) लगाया था, जिससे स्थिति बिगड़ रही थी। हालांकि, बुधवार को दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच बैठक हुई। उनके बीच समझौता होने के बाद अमेरिका ने चीन पर से १० प्रतिशत शुल्क हटा दिया और चीन ने भी दुर्लभ खनिज आपूर्ति फिर से शुरू करने की घोषणा की।
अमेरिका के लिए अच्छी खबर आने के एक दिन बाद, चीन ने भारत को यह बड़ी खुशखबरी दी। इस खनिज आपूर्ति से भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में तेज़ी आने और देश की उत्पादन और आय बढ़ने की उम्मीद है।
इन ४ कंपनियों को मिलेगी सप्लाई:
शुरुआत में चीन भारत की ४ कंपनियों को दुर्लभ खनिज की आपूर्ति करेगा। ये कंपनियां हैं— हिताची, कॉन्टिनेंटल, जे-शिन और डीई डायमंड्स। इन कंपनियों का भविष्य दुर्लभ खनिजों के अंतिम उपयोग से जुड़ी शर्तों के अनुपालन पर निर्भर करेगा।