बागेश्वर धाम प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री की ‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0’ शुरू; 7 नवंबर की तारीख का बताया खास महत्व

बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0’ की शुरुआत दिल्ली से हो गई है। इस दौरान पदयात्रा में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती नज़र आ रही है। पदयात्रा का आगाज़ करते हुए पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि उन्होंने 7 नवंबर से ही इस पदयात्रा की शुरुआत क्यों की।

उन्होंने कहा कि 7 नवंबर वह तारीख है, जब 1966 में इसी 7 नवंबर को, इसी दिल्ली में साधु-संतों और बच्चों के ऊपर गोलियाँ चलाई गई थीं। धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा कि आज पूरा साधु समाज और धर्म सम्राट स्वामी करपात्री महाराज के उस महान गौ आंदोलन को स्मरण करके एक साथ सनातन का साथ 7 नवंबर को यहाँ है।

उन्होंने सत्ताधीशों को कड़ा संदेश देते हुए कहा, “आज का ही वह दिन था, जब धर्मविरोधी ताकतों ने, सत्ता पर बैठे हुए सत्ताधीशों ने निहत्थे संतों पर और हम सभी की प्राण गौ माता के ऊपर गोलियाँ चलाई थीं। हम बदला तो नहीं ले सकते, लेकिन संत समाज 7 नवंबर को एक साथ बैठकर धर्म सम्राट स्वामी करपात्री महाराज के उस अभियान को स्मरण करके आज इसी दिल्ली में कह रहा है कि तुम कितना भी हमें मिटाओ, हम मिटेंगे नहीं, हम झुकेंगे नहीं, हम रुकेंगे नहीं। इसलिए 7 नवंबर से ही सनातनी हिंदू एकता पदयात्रा का दृढ़ संकल्प लिया गया।”

राजनीतिक नहीं, आध्यात्मिक पदयात्रा

इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, “हमारी ये पदयात्रा राजनीतिक पदयात्रा नहीं, ये एक आध्यात्मिक पदयात्रा है। अगर ये राजनीतिक पदयात्रा होती तो हम वृंदावन से दिल्ली तक आते, आध्यात्मिक है, इसलिए दिल्ली से वृंदावन जा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि यह पूरी पदयात्रा, जो भारत में जातिवाद है, उसे खत्म करने के लिए है। “हम चाहते हैं कि जातियाँ तो रहें, लेकिन जातियों का अहंकार न रहे। अब ठान लिया और सभी ने मन में मान लिया कि साधु संतों का कमंडल, बागेश्वर धाम का मंडल 16 तारीख तक चलेगा। अब गली-गली में शोर होगा और सनातन का ज़ोर होगा।”

पंडित धीरेंद्र शास्त्री की ये पदयात्रा 16 नवंबर तक चलेगी, जो वृंदावन में जाकर समाप्त होगी। उन्होंने बताया कि यह यात्रा शक्ति और माया की नगरी (दिल्ली) से भक्ति और महादेव की नगरी वृंदावन जा रही है।

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