राजस्थान की शान जोधपुरी साफा ग्लोबल ट्रेंड में! लंदन से दुबई तक बढ़ी मांग, शादियों का बना ‘पहचान चिह्न’
जोधपुर/नई दिल्ली: राजस्थान की परंपरा और शान का प्रतीक जोधपुरी साफा (Jodhpuri Safa) एक बार फिर शादियों के सीजन में जबरदस्त ट्रेंड में है। आधुनिक पहनावे के बावजूद, यह पारंपरिक पगड़ी समारोहों में एक अद्वितीय गरिमा जोड़ती है। जहाँ पहले लोग स्वयं साफा बांधने का प्रयास करते थे, वहीं अब युवाओं में यह कला कम होने से साफा बांधने वाले कुशल कलाकारों की डिमांड तेजी से बढ़ गई है।
ये अनुभवी कलाकार अब न केवल स्थानीय तौर पर, बल्कि घर-घर और बड़े रिसॉर्ट्स तक जाकर मेहमानों को पारंपरिक अंदाज़ में साफा बांधने का काम करते हैं।
पर्सनल टच से बढ़ी लोकप्रियता जोधपुर के प्रसिद्ध ‘ऋषभ साफा’ जैसे कलाकार इस परंपरागत कला को नई दिशा दे रहे हैं। वे दूल्हे-दुल्हन से लेकर विदेशी मेहमानों तक, सभी के लिए साफा बांधते हैं। ये कलाकार समझते हैं कि साफा केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि व्यक्ति की पहचान और उत्सव का एक अहम हिस्सा है। खास बात यह है कि वे हर व्यक्ति के सिर के आकार, पोशाक के रंग और इवेंट की थीम के अनुसार साफा तैयार करते हैं, जिससे पारंपरिकता और आधुनिकता का सुंदर संगम दिखता है। उनका यही ‘व्यक्तिगत स्पर्श’ (Personal Touch) उनकी बढ़ती मांग का मुख्य कारण है।
विदेशों में भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व कलाकार मुकेश प्रजापत ने बताया कि अब जोधपुर के साफा बांधने वाले कलाकारों की कला दुबई, लंदन, कनाडा और अमेरिका तक पहुंच चुकी है। वहाँ होने वाली भारतीय शादियों में भी इन कलाकारों को विशेष रूप से बुलाया जाता है। विदेशों में रहने वाले भारतीय अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए पारंपरिक राजस्थानी साफा को अत्यधिक महत्व देते हैं। मुकेश कहते हैं, “साफा सिर्फ परिधान नहीं, यह राजस्थान की पहचान और सम्मान का प्रतीक है।” ये कलाकार अपनी कला के माध्यम से वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
आज जोधपुरी साफा न केवल राजस्थान बल्कि पूरे भारत में शादी समारोहों की शान बन गया है। दूल्हे से लेकर बारातियों तक हर कोई अपने पहनावे के साथ पारंपरिक साफा चाहता है, खासकर राजस्थानी थीम वाली शादियों में। कलाकारों के अनुसार, शादी सीजन में साफा बांधने वालों की बुकिंग कई हफ्तों पहले ही फुल हो जाती है, जो इस कला की लोकप्रियता को दर्शाता है।