Gaganyaan Mission का निर्णायक टेस्ट सफल! ISRO ने क्यों कहा- अंतरिक्ष यात्रियों के लिए धरती पर लौटना सबसे ख़तरनाक?

अंतरिक्ष में विचरण के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों पर मंडराने वाले ख़तरों से सब वाक़िफ़ हैं। लेकिन इससे भी ज़्यादा ख़तरे की आशंका उन्हें पृथ्वी पर वापस लौटने के समय होती है। जैसे-जैसे वे पृथ्वी के क़रीब पहुँचते हैं, तीव्र गति के कारण पैराशूट की रस्सी टूटने का जोखिम बढ़ जाता है।

इसी वजह से, ज़मीन या पानी को छूने से पहले अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाले कैप्सूल को सुरक्षित करने के लिए पैराशूट का सहारा लिया जाता है।

भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था इसरो (ISRO) अपने पहले मानव मिशन ‘गगनयान’ के लिए पूरी तरह से तैयार हो रही है। अब इसरो ने इसी ख़तरनाक चरण के परीक्षण में बड़ी सफलता हासिल की है। इसरो ने सफलतापूर्वक इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयर ड्रॉप टेस्ट (Integrated Main Parachute Air Drop Test) पूरा कर लिया है।

झाँसी में सफल लैंडिंग ट्रायल:

पिछले ३ नवंबर को इसरो ने उत्तर प्रदेश के झाँसी स्थित फ़ायरिंग फ़ील्ड रेंज में यह ऐतिहासिक परीक्षण किया। इसका मुख्य उद्देश्य गगनयान के क्रू मॉड्यूल (Crew Module) को पैराशूट की मदद से सुरक्षित रूप से ज़मीन पर उतारने की प्रक्रिया का परीक्षण करना था। वैज्ञानिकों ने इस सफल टेस्ट के ज़रिए पैराशूट की मुख्य भूमिका को परखा है।

गगनयान के १० पैराशूट की रणनीति:

गगनयान मिशन में कुल १० पैराशूट का इस्तेमाल किया जाएगा, जिन्हें ४ मुख्य भागों में बाँटा गया है। अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाले कैप्सूल को सुरक्षित रूप से नीचे लाने के लिए एक विशेष रणनीति अपनाई जाएगी:

  • अवरोहण (Descent) प्रक्रिया २ मुख्य सेपरेशन पैराशूट के साथ शुरू होगी।
  • इसके बाद २ ड्रैग पैराशूट क्रू मॉड्यूल की गति को उल्लेखनीय रूप से कम करेंगे।
  • अंत में, मुख्य पैराशूट खुलेंगे और कैप्सूल को सुरक्षित रूप से ज़मीन या पानी पर उतारेंगे।

इसरो की इस सफलता ने गगनयान मिशन के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण को सुरक्षित कर दिया है।

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