लालू के ‘करीबी’ ने छीनी तेजस्वी की सत्ता! AIMIM के अख्तरुल ईमान के एक दाँव ने बिगाड़ा RJD का खेल।
२०२५ के बिहार विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मुख्य मुस्लिम और यादव वोट बैंक में सेंध लगाने के पीछे असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान का अहम हाथ रहा। लालू प्रसाद यादव के कभी करीबी रहे इस नेता की रणनीति का खामियाजा तेजस्वी यादव को भुगतना पड़ा। यह सिर्फ २०२५ की कहानी नहीं है, बल्कि २०२० के चुनावों में भी AIMIM के उदय के कारण ही तेजस्वी मामूली अंतर से सत्ता से दूर रहे थे।
कभी लालू के खास, अब ओवैसी के सेनापति
चार बार के विधायक अख्तरुल ईमान को सीमांचल क्षेत्र का कद्दावर नेता माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि दो बार RJD को सत्ता से दूर रखने वाले यह नेता कभी लालू प्रसाद यादव के सहायक हुआ करते थे। २०१५ में RJD द्वारा टिकट न दिए जाने पर अख्तरुल ने ओवैसी की पार्टी AIMIM का दामन थाम लिया था।
१९६४ में जन्मे अख्तरुल ने छात्र राजनीति से अपना करियर शुरू किया। स्पष्ट वक्ता होने के कारण मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में उनकी काफी लोकप्रियता है। २००५ में लालू प्रसाद यादव ने उन्हें किशनगंज सीट से उम्मीदवार बनाया और वह जीतकर विधानसभा पहुंचे, हालांकि तब तक RJD सरकार गिर चुकी थी। २०१० में उन्होंने कोचाधामन सीट भी जीती। लेकिन, २०१५ में RJD और JDU के गठबंधन में उनकी सीट JDU कोटे में जाने के बाद उन्होंने पाला बदल लिया।
बदलापुर मिशन: AIMIM को किया मजबूत
२०१५ चुनाव हारने के बाद अख्तरुल ईमान ने सीमांचल में AIMIM की नींव मजबूत करने का काम शुरू किया। ओवैसी ने उन्हें बिहार की कमान सौंप दी। २०२० के बिहार विधानसभा चुनाव में AIMIM ने २० सीटों पर उम्मीदवार उतारे और ५ सीटों पर जीत हासिल की। इन्हीं ५ सीटों ने RJD गठबंधन की सरकार बनाने की संभावनाओं को खत्म कर दिया, जिससे तेजस्वी यादव सत्ता से वंचित रह गए।
२०२५: १३ सीटों पर बिगाड़ा समीकरण
२०२२ में RJD ने ओवैसी की पार्टी में सेंध लगाकर चार विधायकों को अलग कर दिया था, लेकिन २०२५ में अख्तरुल ईमान का दाँव और भी घातक साबित हुआ। मुस्लिम बहुल १३ सीटों पर AIMIM ने उम्मीदवार उतारे, जिनमें से ५ पर जीत दर्ज की और ८ अन्य सीटों पर महागठबंधन की जीत की संभावनाओं को सीधे तौर पर ध्वस्त कर दिया। जोकीहाट, बहादुरगंज, कोचाधामन, अमौर और बायसी जैसी महत्वपूर्ण सीटों के अलावा ठाकुरगंज, कसबा, मधुबनी, दरभंगा ग्रामीण और केओटी जैसी सीटों पर महागठबंधन की हार का मुख्य कारण AIMIM द्वारा वोटों का काटा जाना था।
इस चुनाव ने स्पष्ट कर दिया कि AIMIM के प्रभाव से RJD के मुख्य मुस्लिम वोटर पार्टी से दूर हुए हैं, जिसने तेजस्वी यादव की राजनीतिक राह में बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।