‘वोटर लिस्ट से नाम कटा तो नागरिकता खत्म?’ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, SIR प्रक्रिया पर आयोग ने दूर की चिंता
नई दिल्ली: देश के 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया युद्धस्तर पर चल रही है। इस प्रक्रिया के तहत, प्रत्येक बूथ के ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर वोटरों को दो एन्यूमरेशन फॉर्म (Enumeration Form) सौंप रहे हैं। यह अफवाह फैल गई थी कि यदि ये फॉर्म समय पर जमा नहीं किए गए और वोटर लिस्ट से नाम कट गया, तो लोग अपनी नागरिकता खो सकते हैं।
इस डर और भ्रम को लेकर दायर एक मामले की सुनवाई के दौरान हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत में चुनाव आयोग (Election Commission) ने स्पष्ट कर दिया है कि SIR प्रक्रिया और नागरिकता बिल्कुल अलग हैं।
आयोग का स्पष्टीकरण
चुनाव आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट में नाम न होना किसी भी व्यक्ति की नागरिकता को रद्द नहीं करता है। अगर कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में अपना नाम रजिस्टर नहीं भी करवा पाता है, तब भी उसकी नागरिकता बरकरार रहेगी। आयोग ने यह भी बताया कि संविधान और कानून के अनुसार, वोटिंग अधिकार के लिए आवश्यक दस्तावेज मांगने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि SIR के दौरान किसी का नाम गलती से हटा भी दिया जाता है, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। जिस सामान्य प्रक्रिया से वोटर लिस्ट में नाम शामिल किया जाता है, उसी तरह अगले चरण में भी आवश्यक दस्तावेज़ जमा करके नाम जुड़वाना संभव है।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग वर्तमान में एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया चला रहा है। फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं, और जमा करने की अंतिम तिथि 4 दिसंबर निर्धारित की गई है। परिवार का कोई भी सदस्य ये फॉर्म जमा कर सकता है। इसके अलावा, बाहर रहने वाले वोटर मोबाइल नंबर को EPIC कार्ड से लिंक करके ऑनलाइन भी फॉर्म भर सकते हैं।