पीलीभीत में ‘पुण्य’ का काम बना जानलेवा, जंगल की सड़क पर बंदरों को खिलाना पड़ रहा भारी, स्कूल वैन पलटने से बच्चे घायल

पुण्य कमाने के उद्देश्य से किया गया कार्य अनजाने में पाप की ओर ले जा सकता है, और कुछ ऐसा ही मंजर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में देखने को मिल रहा है। दान-पुण्य के नाम पर, यहां लोग ऐसी गतिविधियों में लिप्त हो रहे हैं जो न केवल जानवरों के लिए, बल्कि इंसानों के लिए भी जानलेवा साबित हो रही हैं। हाल की दुर्घटनाएं इसकी पुष्टि करती हैं, लेकिन न तो जनता जागरूक हो रही है और न ही प्रशासन कोई ठोस कदम उठा रहा है।

हमारी सभ्यता में प्रकृति और उसके तत्वों को पूजा जाता है। जानवरों में, बंदरों को हनुमान का स्वरूप मानकर उनकी सेवा की जाती है, और लोग उन्हें भोजन कराना अत्यंत पुण्य का कार्य समझते हैं। हालांकि, यह घरों की छतों पर स्वीकार्य हो सकता है, लेकिन उनके प्राकृतिक आवास यानी जंगल के रास्ते पर ऐसा करना अब खतरनाक साबित हो रहा है।

हादसों की वजह बन रही जंगल की सड़क

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व से गुजरने वाली माधोटांडा-खटीमा सड़क पर लोग बंदरों के लिए भोजन छोड़ जाते हैं। मंगलवार और शनिवार को कई शहरवासी विशेष रूप से इस कार्य के लिए जंगल का रुख करते हैं। लेकिन यह कृत्य बंदरों और दोपहिया वाहनों से यात्रा करने वाले राहगीरों सहित निर्दोष वन्यजीवों के लिए दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। हाल ही में, इसी सड़क पर बंदरों को बचाने के प्रयास में एक स्कूल वैन पलट गई, जिसमें एक दर्जन बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए।

वन विभाग की लापरवाही

बंदरों के कारण होने वाली दुर्घटनाएं यह पहली नहीं हैं; आए दिन दो पहिया और चार पहिया वाहन हादसों का शिकार हो रहे हैं। इसके बावजूद, जनता इस गलत आदत से अनजान बनी हुई है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि वन अधिकारी भी इस आदत को रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रहे हैं। पुण्य कमाने की यह गलत कोशिश लोगों की जान जोखिम में डाल रही है, जिस पर अधिकारियों को तुरंत सख्ती दिखानी चाहिए।

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