घोड़ी पर सवार होकर दुल्हन पहुंची दूल्हे को लेने! उज्जैन में दिखा अद्भुत नजारा, राजस्थानी परंपरा निभाकर वधू ने दिया समानता का संदेश
उज्जैन: महाकाल नगरी उज्जैन में शादी के इस खूबसूरत मौसम में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सभी को हैरान कर दिया और खुशी से भर दिया। शहर की सड़कें ढोल की थाप से गूंज उठीं, शादी का जुलूस नाचते-गाते आगे बढ़ा, और इस पूरे जश्न के केंद्र में दुल्हन अपूर्वा ओझा एक सजी-धजी घोड़ी पर शान से बैठी थीं। अमूमन दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर दुल्हन से मिलने जाता है, लेकिन इस बार कहानी विपरीत थी—दुल्हन खुद अपने दूल्हे को आमंत्रित करने घोड़ी पर पहुंची थीं।
अपूर्वा ओझा, जो अहमदाबाद में साउथ इंडियन बैंक में क्लास 1 ऑफिसर हैं, उनकी शादी उज्जैन के केजीसी होटल में तय थी। शादी की रस्में शुरू होने से पहले, उन्होंने अपने होने वाले पति, वडोदरा निवासी हर्ष दवे, तक पहुंचने का यह अनोखा तरीका चुना। यह निमंत्रण शोभायात्रा भी वैसी ही भव्य थी: एक बैंड, बाराती और एक सुंदर घोड़ी। विवाह के जोड़े और स्टाइलिश चश्मा पहने अपूर्वा ने जैसे ही घोड़ी पर बैठकर अपनी जश्न की यात्रा शुरू की, हर राहगीर मंत्रमुग्ध हो गया। करीब डेढ़ घंटे तक, सब नाचते, हंसते और खुशी-खुशी आगे बढ़े।
दुल्हन घोड़ी पर क्यों चढ़ी?
अपूर्वा ने बताया कि यह राजस्थान राज्य के श्रीमाली समुदाय की एक परंपरा है, जहां दुल्हन घोड़ी पर सवार होकर दूल्हे के घर जाती है। उन्होंने हंसते हुए कहा, “क्यों सिर्फ लड़के ही मजा करें? हमारे समाज ने हमेशा महिलाओं को समान दर्जा दिया है। यह परंपरा उसी सोच का प्रतीक है। इसे करके मुझे बहुत खुशी हुई, मेरे दोस्त भी इंदौर, बेंगलुरु और वडोदरा से इसे देखने आए थे।”
दूल्हे ने भी जताया गर्व
दूल्हे हर्ष दवे ने अपनी होने वाली पत्नी का इंतजार करते हुए अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, “हमारे यहां पहले घोड़ी पर चढ़ना, फिर दुल्हन और फिर दूल्हा चढ़ने की एक लंबे समय से चली आ रही परंपरा है। आज इस परंपरा का पालन होते देख मुझे गर्व हुआ। दुल्हन को इस स्टाइल में आते देखना वास्तव में एक खास पल था। यह अनोखी रस्म और अपूर्वा का आत्मविश्वास इस शादी को यादगार बना रहा है।”
उज्जैन की सड़कों पर चली इस अपूर्वा दुल्हन ने न केवल परंपरा का सम्मान किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि खुशी, उत्सव और रस्मों पर सबका अधिकार है, चाहे वह दूल्हा हो या दुल्हन। यह विवाह समानता, सम्मान और पुरानी परंपराओं के एक नए रूप का सुंदर उदाहरण बन गया।