जेल से इमरान खान का ‘करो या मरो’ का ऐलान, PTI ने बनाई 3 फ्रंट की रणनीति, कानूनी मोर्चे पर बहनें, सड़क पर उतरे सोहेल अफरीदी
रावलपिंडी की आदियाला जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के साथ मिलकर “करो या मरो” की जंग छेड़ दी है। इस लक्ष्य को साधने के लिए पीटीआई ने तीन मोर्चे बनाए हैं: पहला कानूनी कार्रवाई के लिए, दूसरा सरकार के साथ समन्वय के लिए और तीसरा सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के लिए।
पीटीआई की तीन-सूत्रीय रणनीति:
- १. समन्वय की जिम्मेदारी: पीटीआई के कार्यवाहक अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर के अनुसार, समन्वय का जिम्मा महमूद अचूकजई को दिया गया है, जो हाल ही में पाकिस्तान विधानसभा में विपक्ष के नेता नामित हुए हैं।
- २. सड़कों की लड़ाई: पीटीआई कार्यकर्ता इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर दिसंबर के मध्य तक सड़कों पर उतरने की योजना बना रहे हैं। सड़कों पर संघर्ष की जिम्मेदारी सोहेल अफरीदी को सौंपी गई है। खैबर के पूर्व गवर्नर सोहेल ने गुरुवार (२७ नवंबर) को आदियाला जेल के बाहर धरना दिया और पुलिस से भिड़ गए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर इमरान खान को जल्द रिहा नहीं किया गया तो वह और आक्रामक लड़ाई लड़ेंगे।
- ३. कानूनी मोर्चा: इमरान खान की तीन बहनें उनकी कानूनी लड़ाई की कमान संभाल रही हैं। शुक्रवार (२९ नवंबर) को उनकी बहन आलेमा खान इस्लामाबाद हाईकोर्ट में पेश हुईं। आलेमा ने शिकायत की कि अदालत के निर्देश के बावजूद उन्हें इमरान खान से मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने जेल प्रशासन के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला दायर किया है।
इस बीच, पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने दावा किया है कि इमरान खान का संदेश बाहर प्रचारित हो रहा है, इसीलिए आलेमा खान को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
बेटे का सोशल मीडिया पर तीखा वार:
इमरान खान के बेटे कासिम सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए पोस्ट किया, “अगर मेरे पिता को कुछ होता है, तो पाकिस्तान सरकार और [सेना प्रमुख] आसिफ मुनीर जिम्मेदार होंगे।” कासिम ने पाकिस्तानी सेना से अपने पिता की स्थिति स्पष्ट करने और उन्हें तुरंत परिवार से मिलने की अनुमति देने की मांग की है।