पुतिन का यूक्रेन को अंतिम अल्टीमेटम, “सेना हटाओ या बलपूर्वक कब्ज़ा करेंगे”, अमेरिकी शांति प्रस्ताव को बताया ‘आधार’

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अमेरिका का संशोधित शांति-प्रस्ताव भविष्य में यूक्रेन संघर्ष के समाधान का आधार बन सकता है, लेकिन यह केवल तभी होगा जब यूक्रेन अपनी सेना को उन क्षेत्रों से हटा ले, जिन्हें रूस अपना इलाक़ा मानता है। पुतिन ने चेतावनी दी कि यदि यूक्रेन ऐसा नहीं करता, तो रूस बलपूर्वक इन क्षेत्रों पर कब्ज़ा कर लेगा।

किर्गिज़स्तान की यात्रा के दौरान पुतिन ने कहा— “यदि यूक्रेनी सेना उन क्षेत्रों से हट जाती है, तो हम लड़ाई रोक देंगे। यदि नहीं हटे, तो हम सैन्य कार्रवाई से उसे हासिल करेंगे।” देखा जाए तो रूस वर्तमान में यूक्रेन के लगभग पाँचवे हिस्से पर नियंत्रण बनाए हुए है।

यूक्रेन ने तुरंत किया खारिज:

इस बीच अमेरिका, मॉस्को और कीव दोनों से बातचीत कर एक नया शांति-खाका तैयार करने की कोशिश कर रहा है। हालाँकि यूक्रेन ने पुतिन के इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया। राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के शीर्ष सलाहकार एंड्री यरमाक ने स्पष्ट कहा— “ज़ेलेंस्की के रहते कोई भी हमसे ज़मीन छोड़ने की उम्मीद न करे। वह किसी भी हाल में ऐसा समझौता नहीं करेंगे।” यूक्रेन की राय में फिलहाल वास्तविक बातचीत का आधार सिर्फ मौजूदा १,१०० किलोमीटर लंबी फ्रंटलाइन को परिभाषित करना हो सकता है।

पोक्रोव्स्क पर भीषण संघर्ष और दावे:

ज़मीनी हालात देखें तो डोनेट्स्क क्षेत्र का पोक्रोव्स्क शहर, जिसे रूस क्रास्नोआर्मेयस्क कहता है, भीषण संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। पुतिन का दावा है कि रूसी सेना ने पोक्रोव्स्क को घेर लिया है और रूस 70% शहर पर नियंत्रण कर चुका है। हालाँकि यूक्रेन के शीर्ष सेनापति ओलेक्ज़ांद्र सिरस्की ने इन दावों का खंडन किया है।

पुतिन की कानूनी अड़चन और शर्तें:

पुतिन का यह भी दावा है कि वे यूक्रेन की मौजूदा सरकार को “अवैध” मानते हैं, इसीलिए कीव से सीधा समझौता कानूनी रूप से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अंतिम समझौता तभी संभव होगा जब विश्व समुदाय यूक्रेन में रूस के कब्ज़े वाले क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दे।

पुतिन की यह स्थिति उसे नैतिक जिम्मेदारी से मुक्त दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि पुतिन द्वारा थोपी जा रही शर्तें किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र के लिए आत्मसमर्पण के बराबर हैं।

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