तारापीठ मंदिर में व्यवस्था बहाल करने के लिए सख्त प्रशासन, अब ‘पैसों का खेल’ नहीं चलेगा, नए उप-मंडलाधिकारी ने दिए कड़े निर्देश

तारापीठ मंदिर की व्यवस्था बनाए रखने के लिए रामपुरहाट के नए उप-मंडलाधिकारी (Sub-Divisional Officer) राठौर अश्विनी बाबू सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने मंदिर के सेवादारों के साथ बैठक में स्पष्ट कर दिया है कि पूर्व जिलाधिकारी द्वारा तय किए गए सभी नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। उप-मंडलाधिकारी ने कहा है कि अब से तारापीठ मंदिर में पूजा-अर्चना पुराने नियमों के अनुसार ही होगी, कोई अव्यवस्था नहीं और ‘पैसों का खेल’ नहीं चलेगा। प्रशासन के इस कड़े रुख से आम श्रद्धालुओं ने राहत की साँस ली है।

पूर्व जिलाधिकारी के निर्देश क्या थे?

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और कुछ सेवादारों पर ‘मोटी रकम लेकर’ दर्शन और पूजा कराने की शिकायतों के बाद, पूर्व जिलाधिकारी विधान राय ने इस साल 16 जनवरी को कुछ नियम लागू किए थे:

  • सामान्य लाइन: पहले एक घंटे तक सामान्य लाइन के श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलेगा।
  • विशेष लाइन: विशेष लाइन के लिए निर्धारित कूपन लेना अनिवार्य होगा।
  • गर्भ गृह: गर्भ गृह में प्रवेश के बाद, बाहर निकलने के रास्ते से किसी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
  • स्थानीय श्रद्धालु: स्थानीय श्रद्धालुओं को प्रमाण पत्र दिखाने पर मुफ्त प्रवेश का विशेष पास मिलेगा।

प्रशासन के दबाव के कारण मंदिर समिति ने एक बार फिर गर्भ गृह के अंदर ‘अंजलि’ या ‘श्रृंगार पूजा’ बंद करने का फैसला लिया है। अब से श्रद्धालु गर्भ गृह के बाहर माँ तारा के चरणों में प्रसाद चढ़ा सकते हैं।

हर महीने होगी समीक्षा बैठक:

उप-मंडलाधिकारी ने घोषणा की है कि मंदिर में अनुशासन बनाए रखने के लिए हर महीने समीक्षा बैठक (Review Meeting) आयोजित की जाएगी। हर महीने की 1 तारीख को मंदिर समिति के साथ बैठक करके यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।

श्रद्धालुओं की शिकायत है कि तारापीठ में नियम तो बनते हैं, लेकिन कुछ ही महीनों बाद सेवादार उन्हें तोड़ देते हैं। अब देखना यह है कि नए उप-मंडलाधिकारी इस सख्ती को कितने दिनों तक कायम रख पाते हैं।

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