मौत को मात देने वाली DRDO की तकनीक! ध्वनि से तेज फाइटर जेट से पायलट को बचाएगा ‘रॉकेट स्लेड’, चंडीगढ़ में सफल परीक्षण

देश की सुरक्षा की नींव सेना की ताकत और सुरक्षा पर टिकी है। भारतीय वायुसेना के पास अब ध्वनि की गति से भी तेज उड़ने वाले कई अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हैं। लेकिन अत्यधिक ऊँचाई या तीव्र गति पर किसी आपात स्थिति में पायलट को विमान से सुरक्षित बाहर निकालना एक बड़ी चुनौती थी। अब डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने इस चुनौती को आसान कर दिया है।

DRDO ने हाई-स्पीड जेट से पायलट को सुरक्षित बाहर निकालने (इजेक्शन) की प्रणाली का सफल परीक्षण किया है। यह ‘हाईस्पीड रॉकेट स्लेड टेस्ट’ चंडीगढ़ की टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कैसे हुआ परीक्षण: TBRL में बिछाई गई एक विशेष रेललाइन पर रॉकेट स्लेड का उपयोग करके परीक्षण को अत्यधिक गति से अंजाम दिया गया। यह आसमान में तेज गति से उड़ रहे लड़ाकू विमान से पायलट के निकलने की प्रक्रिया का प्रतिकृति (रेप्लिका) था।

परीक्षण के दौरान, लड़ाकू विमान के कॉकपिट के ऊपर का पारदर्शी हिस्सा (कैनोपी) सटीक गणना के अनुसार टूटकर बाहर निकला, और पायलट की सीट पर रखा एक डमी नियंत्रित तरीके से बाहर आ गया। इसके बाद, ठीक उसी तरह जैसे हवा में होता है, डमी की पीठ पर लगा पैराशूट निर्धारित समय पर खुल गया। पूरी प्रक्रिया अत्यंत नियंत्रित और सटीकता के साथ पूरी हुई और परीक्षण पूरी तरह सफल रहा।

भारतीय वायुसेना के अधिकारियों और इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन के सदस्यों ने इस पूरे परीक्षण की बारीकी से निगरानी की। DRDO की इस ऐतिहासिक सफलता के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई दी है। यह तकनीक भारतीय वायुसेना के प्रत्येक पायलट की सुरक्षा को कई गुना अधिक मजबूत करेगी।

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