उत्तर बंगाल की जानबूझकर उपेक्षा! ₹3.7 लाख करोड़ के बजट में सिर्फ ₹861 करोड़ आवंटित, विधायक दीपक बर्मन ने TMC को घेरा
उत्तर बंगाल के विकास में राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा बाधा डालने, बुनियादी ढाँचे की विफलता और समग्र उपेक्षा को लेकर बुधवार को सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में विधायक और पार्टी के राज्य महासचिव दीपक बर्मन ने तीखा हमला किया। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि TMC शासित राज्य सरकार उत्तर बंगाल के लोगों को इंसान ही नहीं मानती।
बजट में भेदभाव और उपेक्षा: दीपक बर्मन ने आरोप लगाया कि भौगोलिक रूप से उत्तर बंगाल राज्य की लगभग 18% भूमि और 18% आबादी को समाहित करता है, फिर भी 2024-25 के वित्तीय वर्ष में राज्य के ₹3.7 लाख करोड़ के बजट में उत्तर बंगाल के लिए केवल ₹861 करोड़ आवंटित किए गए हैं। उन्होंने दावा किया, “कोलकाता के लिए जो आवंटन होता है, उत्तर बंगाल को उसका एक चौथाई भी नहीं मिलता।”
केंद्रीय परियोजनाओं में राज्य सरकार की बाधाएं: विधायक का मुख्य आरोप है कि जब केंद्र सरकार बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए बड़ी परियोजनाओं की घोषणा करती है, तो राज्य सरकार की एकमात्र भूमिका उन कार्यों के कार्यान्वयन में बाधा डालना होती है।
- फोर लेन सड़क: जलपाईगुड़ी से असम तक फोर लेन सड़क का काम डीएम कार्यालय की अस्पष्ट मुआवजा नीति के कारण रुका हुआ है। एक ही दाग की जमीन पर एक मालिक को ₹2 लाख और दूसरे को केवल ₹50 हजार प्रति डेसीमल देने से लोग जमीन देने से मना कर रहे हैं।
- एम्स और ट्रॉमा सेंटर: उत्तर बंगाल के लिए आवंटित एम्स, कूचबिहार-रायगंज मेडिकल कॉलेजों के लिए ₹113.40 करोड़ और मालदा ट्रॉमा सेंटर के लिए ₹120 करोड़ होने के बावजूद राज्य सरकार इस राशि को खर्च करने में आनाकानी कर रही है।
- रिंग रोड और एयरपोर्ट: सिलीगुड़ी में रिंग रोड के लिए केंद्र की ₹3.5 हजार करोड़ की मंजूरी होने के बावजूद राज्य की निष्क्रियता के कारण काम अधूरा है। अलीपुरद्वार के हासीमारा एयरबेस के लिए 37.74 एकड़ जमीन देने से राज्य के इनकार के कारण नया टर्मिनल बनना संभव नहीं हो पा रहा है।
बुनियादी ढांचे की गंभीर विफलता: दीपक बर्मन ने पिछली बाढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि 1993 की बाढ़ में बह गया मुजनाई नदी का पुल 32 साल में भी दोबारा नहीं बनाया गया; लोग आज भी बाँस के अस्थायी पुल से आवागमन करते हैं। गिरिया नदी का पुल भी टूटकर खतरनाक स्थिति में पड़ा है।
‘रेत सिंडिकेट’ में व्यस्त सरकार: विधायक ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के उत्तर बंगाल दौरे का असली मकसद ‘रेत-पत्थर सिंडिकेट’ पर नजर रखना है। उन्होंने कहा कि रेत और बोल्डर की तस्करी से कई नदियाँ नष्ट हो रही हैं, पुलों के खंभे तक क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, और इस सिंडिकेट में थानों के ओसी से लेकर जिले के एसपी तक शामिल हैं। जंगल के बड़े पेड़ काट दिए गए हैं, और हाथियों के हमलों में घायल लोगों के इलाज का पूरा खर्च राज्य नहीं उठा रहा है, जो अमानवीय है।
उन्होंने साफ कहा कि राज्य सरकार विभिन्न बहाने से केंद्र के विकास को रोक रही है और आम जनता समय आने पर इसका जवाब देगी।