आदर्श समाज की ओर एक कदम, कांस्टेबल अनिल कुमार की पहल से कूड़ा बीनने वाले 12 बच्चे अब स्कूल जा रहे

समाज को आदर्श बनाने का सीधा रास्ता हर बच्चे को उचित शिक्षा और संस्कार देना है, लेकिन कई बच्चे हकीकत की कठोरता में इस मौके से वंचित रह जाते हैं। इसी संदर्भ में, उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से एक पुलिस कांस्टेबल की मानवता की मिसाल सामने आई है।

गाजीपुर के पहाड़पुर गांव के कई बच्चे स्कूल जाने के बजाय रोजाना कूड़ा बीनते थे और अपनी कमाई से परिवार का भरण-पोषण करते थे। देवकाली ब्लॉक के माउपाड़ा प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य से जब जेल में तैनात पुलिस कांस्टेबल अनिल कुमार को इस बारे में पता चला, तो वह चौंक गए।

कांस्टेबल ने साझा किया अपना संघर्ष:

कांस्टेबल अनिल कुमार ने व्यक्तिगत रूप से गांव जाकर बच्चों और उनके परिवारों से बात करने का फैसला किया। बातचीत में पता चला कि गरीबी और कई परिवारों में नशाखोरी के कारण माता-पिता बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे थे। शिक्षकों ने इन बच्चों का दाखिला तो करा दिया था, लेकिन उन्हें वापस लाने की कोशिश नहीं की थी।

कांस्टेबल अनिल ने बच्चों के माता-पिता के साथ अपने संघर्ष की कहानी साझा की। उन्होंने समझाया कि कैसे उन्होंने घोर गरीबी से लड़कर पुलिस का यह पद हासिल किया। उनके प्रेरक शब्दों का परिवारों पर गहरा असर पड़ा और वे बच्चों को स्कूल भेजने के लिए सहमत हो गए।

छोटी कोशिश, बड़ा बदलाव:

इसके बाद, अनिल कुमार ने अपनी पहल पर 12 बच्चों को नोटबुक, पेंसिल और चॉकलेट प्रदान किए। वह उन्हें स्कूल ले गए, कक्षा में सहज होने में मदद की और अन्य छात्रों से उनका परिचय कराया।

इस छोटे से प्रयास के परिणामस्वरूप, लगभग एक दर्जन बच्चे अब कूड़ा उठाने के बजाय पिछले एक हफ्ते से बैग लेकर स्कूल जा रहे हैं। कांस्टेबल अनिल कुमार ने कहा, “अगर एक छोटी सी कोशिश भी किसी बच्चे की जिंदगी बदल सकती है, तो इससे बड़ी खुशी और कुछ नहीं हो सकती।”

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