BLO के उत्पीड़न पर कोर्ट का राज्य को कड़ा संदेश, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्यपाल ने राज्य सरकार को दिए आपातकालीन निर्देश

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के उत्पीड़न और उनके काम में बाधा डालने की शिकायतों पर, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ा संदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ‘अराजकता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी’ और BLO के काम में धमकी या बाधा को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के आधार पर, राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने राज्य सरकार से तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया है। राज्यपाल की ओर से निम्नलिखित बिंदुओं पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं:

राज्यपाल के आपातकालीन निर्देश:

  • जमीनी स्तर पर सुरक्षा: जिला प्रशासन को गांव से लेकर शहर तक—प्रत्येक बूथ पर उचित सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने का निर्देश देना होगा, क्योंकि BLO बूथ-आधारित काम कर रहे हैं।
  • पुलिस निगरानी और सहायता: एसआईआर ड्राइव के दौरान राज्य पुलिस को पर्याप्त संख्या में पुलिस कर्मियों को बूथ क्षेत्रों में तैनात करके BLO के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
  • बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना: BLO यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे बिना किसी बाधा के अपना कर्तव्य निभा सकें, सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं तुरंत प्रदान की जानी चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के अनुसार, एसआईआर जैसी महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, BLO की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब राज्य का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व है।

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