7वां वेतन आयोग! 31 दिसंबर की समय सीमा! मांगें पूरी न होने पर संगठन ने दी हाईकोर्ट में केस करने की चेतावनी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारी और शिक्षक लंबे समय से महंगाई भत्ता (DA) और नए वेतन आयोग (7th Pay Commission) के गठन की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2025 लगभग समाप्त होने को है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से अभी तक सातवें वेतन आयोग को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई है, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है।

कानूनी लड़ाई की धमकी इस स्थिति के बीच, राज्य के सरकारी कर्मचारी संगठन एक बार फिर मुखर हो गए हैं। हाल ही में, राज्य सरकारी कर्मचारी संगठन यूनिटी फोरम ने राज्य सरकार पर दबाव बनाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है। उनकी मांग है कि 31 दिसंबर तक राज्य को हर हाल में सातवें वेतन आयोग का गठन करना होगा। ऐसा न करने पर, यूनिटी फोरम ने कानूनी रास्ता अपनाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में मुकदमा दायर करने की धमकी दी है।

मुख्यमंत्री के पास पहुंचा ‘शिक्षणानुरागी ऐक्य मंच’ यूनिटी फोरम के कड़े रुख के बाद, अब शिक्षक संगठन ‘शिक्षणानुरागी ऐक्य मंच’ ने सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन के महासचिव किंकर अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र शुक्रवार को मुख्यमंत्री को सौंपा गया है।

🔴 मुख्य मांगें: बकाया डीए और नया कमीशन पत्र में राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित बकाया महंगाई भत्ते (DA) को तुरंत जारी करने और जल्द से जल्द नए वेतन आयोग का गठन करने की जोरदार मांग की गई है। ‘शिक्षणानुरागी ऐक्य मंच’ को उम्मीद है कि राज्य सरकार मानवीय दृष्टिकोण से उनकी मांगों पर विचार करेगी।

एआईसीपीआई (AICPI) के अनुसार डीए की मांग ममता बनर्जी को दिए गए पत्र में एक विशेष समय सीमा निर्धारित करने की मांग की गई है। संगठन चाहता है कि 2026 के जनवरी महीने से ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) के अनुसार बकाया डीए का भुगतान कर दिया जाए।

परंपरा के अनुसार आयोग गठन का आग्रह पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि अतीत में केंद्र सरकार द्वारा वेतन आयोग का गठन करने के तुरंत बाद ही राज्य में भी नया आयोग आता था। इसी परंपरा का पालन करते हुए, मुख्यमंत्री से जल्द से जल्द राज्य के शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग के गठन का अनुरोध किया गया है।

भविष्य की चिंता गौरतलब है कि सब कुछ ठीक रहा तो 2026 में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) आने वाला है। जबकि पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारी अभी भी छठे वेतन आयोग (6th Pay Commission) के दायरे में हैं। दोनों के बीच के इस बड़े अंतर से कर्मचारियों में निराशा बढ़ रही है। यूनिटी फोरम और ‘शिक्षणानुरागी ऐक्य मंच’ के पत्रों के बाद नबन्ना क्या कदम उठाता है, इस पर राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों की निगाहें टिकी हुई हैं।

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