बॉक्स ऑफिस कलेक्शन नहीं, ट्रक ड्राइवर को देखकर काजोल ने समझी DDLJ की सफलता! बताया कामयाबी का असली मतलब

क्या सफलता की परिभाषा केवल बड़ा बॉक्स ऑफिस कलेक्शन है? बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल (Kajol) के लिए कामयाबी का मतलब बिल्कुल अलग है। हाल ही में ‘जस्ट टू फिल्मी बेस्ट ऑफ ओटीटी राउंडटेबल 2025’ में भाग लेते हुए, उन्होंने अपने जीवन के उन विशेष पलों को साझा किया, जिन्होंने उन्हें एक अभिनेता के रूप में सार्थकता दी।

काजोल ने अपने करियर की मील का पत्थर मानी जाने वाली फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ (DDLJ) को याद करते हुए बताया कि फिल्म की रिलीज के बाद एक छोटी सी घटना ने उन्हें इसकी अपार सफलता की गहराई का एहसास कराया। अभिनेत्री ने बताया कि एक दिन फिल्म सिटी से गाड़ी चलाकर लौटते समय सिग्नल पर एक ट्रक आकर उनकी कार के बगल में रुका। उस ट्रक का ड्राइवर केवल काजोल को एकटक देख रहा था।

उस पल को याद करते हुए काजोल हंसते हुए कहती हैं, “तभी पहली बार महसूस हुआ— अच्छा, फिल्म सच में लोगों के दिलों की गहराई तक पहुँच गई है।” काजोल के लिए बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से ज्यादा, एक आम आदमी की आँखों में उस प्यार या प्रशंसा को देखना ही असली सफलता थी।

लंदन में DDLJ की मूर्ति आज भी अविश्वसनीय

तीन दशक बीत जाने के बाद भी, लंदन के लीसेस्टर स्क्वायर में DDLJ की मूर्ति का अनावरण होना काजोल को आज भी अविश्वसनीय लगता है। वह कहती हैं, “जहाँ हमने शूटिंग की थी, आज वहाँ हमारी फिल्म की मूर्ति खड़ी है, यह सोचकर ही हैरानी होती है।” उनके अनुसार, यह वैश्विक मंच पर भारतीय सिनेमा की जीत साबित करता है।

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपने काम, खासकर ‘द ट्रायल’ (The Trial) सीरीज़ के बारे में बात करते हुए काजोल ने कहा कि उन्होंने पाया है कि मौजूदा समय में दर्शकों का नजरिया बहुत बदल गया है। उनके शब्दों में, “आज महिलाएँ कंटेंट पर बहुत अधिक चर्चा कर रही हैं, जो कहानी सुनाने के तरीके में भी नयापन ला रहा है।” इस विशेष गोलमेज बैठक में काजोल के साथ-साथ फिल्म निर्माता समीर नायर, विक्रमादित्य मोटवाने, नागेश कुकुनूर और अभिनेता अभिषेक बनर्जी और रसिका दुग्गल भी मौजूद थे।

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