पुरुलिया के लिए काला दिन! मानभूम संस्कृति के ‘जीवंत शब्दकोश’ दिलीप कुमार गोस्वामी का निधन

पुरुलिया और मानभूम के लोक-सांस्कृतिक इतिहास को सहेजने वाले महान शोधकर्ता और साहित्यकार दिलीप कुमार गोस्वामी का ७२ वर्ष की आयु में निधन हो गया है। लंबे समय से बीमार चल रहे गोस्वामी ने शनिवार को अंतिम सांस ली। उनके निधन से पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक जगत में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।

दिलीप कुमार गोस्वामी को ‘मानभूम के भाषा आंदोलन’ और ‘पुरुलिया के मंदिरों’ पर उनके गहन शोध के लिए जाना जाता है। १९५३ में जन्मे गोस्वामी ने अपनी लेखनी से पुरुलिया की लुप्त होती परंपराओं को नई पहचान दी थी। उन्होंने साल २०१३ में शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी हरिपद साहित्य मंदिर के संग्रहालय के माध्यम से इतिहास की खोज जारी रखी थी।

साहित्य जगत के दिग्गजों ने उनके निधन को जिले की संस्कृति के लिए एक बड़ी क्षति बताया है। उनके द्वारा रचित ‘पंचकोट का इतिहास’ और ‘मानभूम के साधक’ जैसी पुस्तकें हमेशा पाठकों का मार्गदर्शन करती रहेंगी।

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