भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा में ऐतिहासिक बदलाव 2025 बना रणनीतिक शक्ति का नया अध्याय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2025 भारत की शासन व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ है। मायगव के पूर्व निदेशक अखिलेश मिश्र के अनुसार, भारत ने अब केवल राजनयिक संयम के बजाय दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति से खतरों को जड़ से मिटाने की नीति अपनाई है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकवाद को युद्ध घोषित करना और सिंधु जल समझौते पर सख्त रुख अपनाना यह दर्शाता है कि भारत अब अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।
आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर भी देश ने नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। प्रभावित जिलों की संख्या 182 से घटकर महज 11 रह गई है और 2026 तक नक्सल मुक्त भारत का लक्ष्य तय किया गया है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करते हुए भारत का उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात ने 23,600 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। ये बदलाव रक्षा और कूटनीति के क्षेत्र में भारत की वैश्विक साख को एक नई पहचान दे रहे हैं।