बेटों की लापरवाही पर सीएम का बड़ा प्रहार! ‘प्रणाम’ योजना से मिलेगा बुजुर्गों को सहारा, सरकारी नौकरी वालों के लिए सख्त नियम

शादी के बाद माता-पिता को अकेला छोड़ देने वाले बच्चों और खासकर सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ तेलंगाना सरकार ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने घोषणा की है कि जो कर्मचारी अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं करेंगे, उनके वेतन से 10 से 15 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। काटी गई यह राशि सीधे उनके माता-पिता के बैंक खाते में जमा की जाएगी ताकि वे अपना जीवन सम्मान के साथ जी सकें।
हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रुप-1 और ग्रुप-2 जैसी परीक्षाओं में सफल होने वाले 90% छात्र गरीब परिवारों से आते हैं। उनके माता-पिता ने अपनी जरूरतों को मारकर उन्हें पढ़ाया-लिखाया है। सीएम रेड्डी ने भावुक होते हुए कहा, “माता-पिता अपना खून-पसीना एक कर बच्चों को काबिल बनाते हैं, लेकिन कामयाबी मिलने और शादी होने के बाद कुछ बच्चे उन्हें बोझ समझने लगते हैं। ऐसे कृतघ्न बच्चों के खिलाफ हम जल्द ही कड़ा कानून बनाएंगे।”
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ‘प्रणाम’ (PRANAM) योजना का भी जिक्र किया। इस योजना के तहत, उपेक्षित बुजुर्गों के लिए डे-केयर सेंटर बनाए जाएंगे, जहां सरकार उनके परिवार की तरह देखभाल करेगी। इसके अलावा, तेलंगाना सरकार ने दिव्यांगों की सहायता के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है और दिव्यांग जोड़ों को 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री का यह कदम बुजुर्गों के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी तय करने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है।