करप्शन पर सुप्रीम कोर्ट का प्रहार: अब राज्य की ACB भी लेगी केंद्रीय अफसरों की क्लास, CBI का एकाधिकार खत्म!

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को और अधिक प्रभावी बनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अब राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और राज्य पुलिस, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ जांच करने और आरोप पत्र दाखिल करने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का कोई विशेष या एकमात्र अधिकार क्षेत्र नहीं है।

यह फैसला राजस्थान उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ अपील के दौरान आया, जिसमें एक केंद्रीय अधिकारी ने तर्क दिया था कि उसकी जांच केवल सीबीआई द्वारा ही की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान (DSPE) अधिनियम राज्य पुलिस को उनके अधिकार क्षेत्र के भीतर हुए अपराधों की जांच करने से नहीं रोकता, चाहे आरोपी का नियोक्ता केंद्र सरकार ही क्यों न हो।

अदालत ने यह भी साफ किया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत ‘उचित सरकार’ से पूर्व अनुमति लेना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जांच केवल किसी विशिष्ट संघीय एजेंसी (CBI) तक ही सीमित रहनी चाहिए। इस फैसले से अब केंद्रीय कर्मचारी अपने ओहदे का इस्तेमाल कर स्थानीय जांच से बच नहीं पाएंगे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय ‘सहकारी संघवाद’ के मॉडल को मजबूत करता है और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में राज्यों को एक शक्तिशाली हथियार प्रदान करता है।

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