डोमिसाइल सर्टिफिकेट पर चुनाव आयोग का ‘यू-टर्न’! बंगाल में नागरिकता के सबूत को लेकर मचा कोहराम!

पश्चिम बंगाल में इन दिनों ‘डोमिसाइल सर्टिफिकेट’ (निवास प्रमाण पत्र) को लेकर भारी भ्रम और विवाद की स्थिति बनी हुई है। एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के बीच, चुनाव आयोग ने अचानक घोषणा की है कि मतदाता सूची या नागरिकता की सुनवाई के दौरान डोमिसाइल सर्टिफिकेट को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। आयोग के इस फैसले ने उन हजारों लोगों की चिंता बढ़ा दी है जिन्होंने इस उम्मीद में आवेदन किया था कि यह उनकी भारतीय नागरिकता का पुख्ता सबूत बनेगा।

क्या है आयोग की आपत्ति? चुनाव आयोग का कहना है कि पश्चिम बंगाल में डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है। नियमतः यह प्रमाणपत्र केवल जिला मजिस्ट्रेटों द्वारा जारी किया जाना चाहिए, लेकिन बंगाल में एसडीएम (SDO) स्तर के अधिकारी भी इसे जारी कर रहे हैं। आयोग का तर्क है कि चूंकि ये अधिकारी चुनावी प्रक्रिया का भी हिस्सा हैं, इसलिए इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। इसके अलावा, राज्य के नियमों के अनुसार यह मुख्य रूप से अर्धसैनिक बलों में नौकरियों के लिए था, न कि नागरिकता साबित करने के लिए।

प्रशासनिक हलचल और राजनीति: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है, उनका कहना है कि इससे प्रवासी मजदूरों को परेशानी होगी। वहीं, कोलकाता पुलिस के पास वेरिफिकेशन के लिए आवेदनों का अंबार लग गया है। अकेले हरिदेवपुर और बेहाला जैसे इलाकों से हजारों आवेदन आए हैं, जिन्हें निपटाने के लिए लालबाजार ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने पलटवार करते हुए कहा कि राज्य सरकार नियमों को ताक पर रखकर सर्टिफिकेट बांटना चाहती है जिसे आयोग के अपडेटेड सॉफ्टवेयर ने पकड़ लिया है।

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