महाकाल में ‘VIP’ भक्ति पर घमासान! गर्भगृह में आम भक्तों की नो-एंट्री पर छिड़ी नई बहस

विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर के मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। मामला गर्भगृह में प्रवेश को लेकर है। देशभर से आने वाले लाखों श्रद्धालु बाबा के करीब जाकर दर्शन करने की आस लेकर आते हैं, लेकिन उन्हें बैरिकेड्स के बाहर से ही संतोष करना पड़ता है। वहीं, दूसरी ओर वीआईपी और प्रभावशाली लोगों को आसानी से गर्भगृह में जाकर पूजन की अनुमति मिल जाती है। इसी भेदभावपूर्ण व्यवस्था को लेकर भक्तों में नाराजगी बढ़ रही है।

न्यायिक स्थिति और प्रशासन का तर्क: यह विवाद कानूनी दहलीज तक भी पहुंचा। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया था कि गर्भगृह में प्रवेश का अंतिम अधिकार उज्जैन कलेक्टर के पास होगा और वही तय करेंगे कि किसे अनुमति दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस व्यवस्था में दखल देने से इनकार कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि ‘महाकाल लोक’ बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में चार गुना इजाफा हुआ है। रोजाना एक से दो लाख लोग दर्शन के लिए आ रहे हैं। इतनी भीड़ में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए गर्भगृह में आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित करना मजबूरी है।

भक्तों की मांग: श्रद्धालुओं का तर्क है कि यदि वीआईपी लोगों के लिए व्यवस्था की जा सकती है, तो आम भक्तों के लिए भी कोई पारदर्शी और सुव्यवस्थित मार्ग क्यों नहीं बनाया जा सकता? सावन के महीने में भीड़ का हवाला देकर बंद किया गया गर्भगृह अब नियमित रूप से आम लोगों के लिए बंद है। भक्तों की मांग है कि बाबा के दरबार में अमीर-गरीब का भेद खत्म होना चाहिए और दर्शन के नियम सभी के लिए एक समान होने चाहिए।

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