ममता के वार पर चुनाव आयोग का पलटवार! “कानून हाथ में लिया तो होगी जेल”, ज्ञानेश कुमार की सीधी चेतावनी

दिल्ली के चुनाव सदन में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ हुई तीखी बहस और उनके द्वारा लगाए गए “दलाल” जैसे गंभीर आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने अब आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी राजनीतिक दबाव में नहीं आएगा और मतदाता सूची संशोधन (SIR) की प्रक्रिया कानून के दायरे में ही पूरी होगी।

टीएमसी पर गंभीर आरोप: आयोग ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस के विधायक और कार्यकर्ता न केवल चुनाव अधिकारियों को धमका रहे हैं, बल्कि सरकारी दफ्तरों (SDO/BDO) में तोड़फोड़ भी कर रहे हैं। आयोग ने मुर्शिदाबाद की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

चुनाव आयोग के प्रमुख बिंदु:

  • अधिकारियों की सुरक्षा: SIR के काम में लगे किसी भी कर्मचारी को डराने या बाधा डालने की अनुमति किसी को नहीं है।
  • ट्रांसफर विवाद: राज्य सरकार ने आयोग की सलाह के बिना तीन चुनाव निरीक्षकों का तबादला कर दिया, जो नियमों के खिलाफ है। आयोग ने इस आदेश को तुरंत रद्द करने को कहा है।
  • भत्ता मामला: BLO के लिए निर्धारित 18,000 रुपये के भत्ते में से केवल 7,000 रुपये दिए जाने पर भी आयोग ने नाराजगी जताई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने संदेश दिया है कि आयोग अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। ममता बनर्जी की दिल्ली यात्रा और चुनाव आयोग का यह जवाब आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए बड़े सियासी टकराव का संकेत है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *