निजी खुशियों पर काम का बोझ और बॉस की मनमानी क्या कर्मचारियों को मशीन बना रही है

निजी खुशियों पर काम का बोझ और बॉस की मनमानी क्या कर्मचारियों को मशीन बना रही है

एक झलक न्यूज़ डेस्क : एक महिला कर्मचारी को उसकी सगाई से ठीक पहले काम पर बुलाने और शादी को ‘इమरजेंसी’ न मानने के बॉस के फैसले ने कॉर्पोरेट जगत के कड़वे सच को उजागर किया है। दो महीने पहले सूचना देने के बावजूद छुट्टी रद्द करना यह दर्शाता है कि आधुनिक कार्य संस्कृति में मानवीय भावनाओं और निजी जीवन की कोई जगह नहीं बची है। इससे आम आदमी के मानसिक स्वास्थ्य और कार्य-जीवन संतुलन पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

जब कंपनियों के लिए काम ही सब कुछ हो जाए और कर्मचारी की खुशियाँ गौण, तो समाज में तनाव और असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। यदि एक व्यक्ति अपनी खुद की सगाई के लिए समय नहीं निकाल सकता, तो यह पेशेवर नैतिकता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। ऐसी घटनाएं कर्मचारियों के मनोबल को तोड़ती हैं और उन्हें मशीन की तरह महसूस कराती हैं, जो अंततः उत्पादकता और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।

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