दहेज उत्पीड़न का आरोप और अलग रहने की जिद, कोर्ट ने खारिज की पत्नी की भरण-पोषण की अर्जी।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भरण-पोषण (Maintenance) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई पत्नी बिना किसी वैध या उचित कारण के अपने पति और ससुराल वालों से अलग रहने का फैसला करती है, तो वह गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं होगी। बिलासपुर की पारिवारिक अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला? बिलासपुर निवासी प्रवीण कुमार वेदुला की पत्नी ने पति से अलग रहते हुए भरण-पोषण की मांग की थी। पारिवारिक अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसे महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि पारिवारिक अदालत का फैसला बिल्कुल सही था।

अदालत की अहम टिप्पणी: कोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १२५(४) के तहत, यदि पत्नी बिना किसी पर्याप्त कारण के अलग रहती है, तो वह भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती। इस मामले में पति ने ‘हिंदू विवाह अधिनियम’ की धारा ९ के तहत दांपत्य अधिकारों की बहाली के लिए आवेदन किया था, यानी वह पत्नी को साथ रखना चाहता था। इसके बावजूद पत्नी वापस नहीं लौटी।

झूठे आरोपों पर सख्ती: महिला ने आरोप लगाया था कि शादी के चार दिन बाद ही उससे कार और १० लाख रुपये की मांग की गई और उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि इन आरोपों में दम नहीं है और पति के घर न लौटने का कोई ठोस कारण नहीं दिया गया। कोर्ट ने कहा कि पारिवारिक अदालत के आदेश में कोई अवैधता या त्रुटि नहीं है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। पति की ओर से वकील नेल्सन पन्ना और आशुतोष मिश्रा ने दलीलें पेश कीं।

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