भारत आते ही 21 दिन में ‘डील डन’! कौन हैं सर्जियो गोर, जिन्होंने ट्रंप-मोदी के बीच खत्म कराया टैरिफ विवाद?

भारत और अमेरिका के बीच महीनों से चल रहे ‘ट्रेड वॉर’ को खत्म करने में जिस शख्स ने सबसे अहम भूमिका निभाई, वह कोई और नहीं बल्कि भारत में अमेरिका के सबसे युवा राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) हैं। 38 वर्षीय गोर ने दिल्ली में कार्यभार संभालने के महज 21 दिनों के भीतर वह कर दिखाया, जिसकी उम्मीद पिछले कई महीनों से की जा रही थी। ट्रंप के इस खास दूत ने अपनी सक्रिय कूटनीति से टैरिफ विवाद को सुलझाकर ‘डील डन’ करवा दी है।

कौन हैं सर्जियो गोर? नवंबर 1986 में ताशकंद (उज्बेकिस्तान) में जन्मे सर्जियो गोर 1999 में अपने परिवार के साथ अमेरिका चले गए थे। वह ट्रंप के ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) कैंपेन के प्रमुख रणनीतिकार रहे हैं और ट्रंप के उन चुनिंदा करीबियों में से एक हैं जिन पर राष्ट्रपति अटूट भरोसा करते हैं। जनवरी 2026 में जब उन्हें भारत भेजा गया, तो उनके पास टैरिफ विवाद सुलझाने की बड़ी जिम्मेदारी थी।

कैसे हुई डील? सर्जियो गोर ने भारत आते ही कमान संभाल ली थी। उन्होंने आते ही बयान दिया था कि “सच्चे दोस्त असहमत हो सकते हैं, लेकिन वे हमेशा रास्ता निकाल लेते हैं।” पिछले 21 दिनों में भारत और अमेरिका के बीच अधिकारियों और मंत्रियों के स्तर पर कई मुलाकातें हुईं। गोर ने न केवल मोदी और ट्रंप की दोस्ती का हवाला दिया, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर उन पेचीदा बिंदुओं को सुलझाया जिन पर बातचीत अटकी हुई थी। आखिरकार, ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ को 50% (दंडात्मक सहित) से घटाकर 18% करने की घोषणा कर दी। विशेषज्ञों का मानना है कि सर्जियो गोर का ट्रंप के बेहद करीब होना इस डील के लिए ‘गेमचेंजर’ साबित हुआ।

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